मुजफ्फरपुर : शहर की सघन और अतिव्यस्ततम इलाकों में से एक सरैयागंज स्थित पटाखा मंडी में सुरक्षा के इंतजाम के बीच असुरक्षित है। वजह पटाखा दुकानों में दुकानदारों ने सेफ्टी के नाम पर सीजफायर नामक अग्निशामक तो लगा लिया है। लेकिन, जिस तरह बस्ती और बाजार घना है, उससे इसकी सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इस इलाके में दर्जनों दुकान के पीछे और उपरी मंजिल पर आवास है। इन्हीं आवासीय इलाकों में पटाखों का गोदाम भी है। इस इलाके में पटाखे का खुदरा और थोक का 40 निबंधित दुकानें हैं। जिनके पास फायर सेफ्टी की व्यवस्था भी है। हर साल इसका नवीकरण कराया जाता है। अग्निशमन विभाग एनओसी देती है। लेकिन, दीपावली के दौरान यहां दुकानों की संख्या दोगुनी बढ़ जाती है। इनमें आधे दुकानदार अवैध तरीके से पटाखों की खरीद बिक्री और भंडारण भी करते हैं। पिछले साल कई ऐसे दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई भी की गई थी। इन सबके बीच अगर इस इलाके में दरभंगा जैसी वारदात सामने आ जाए तो यहां की तस्वीर भयावह हो सकती है। हालांकि, स्थानीय दुकानदार बताते है कि सुरक्षा को लेकर सभी चौकन्ने है। मो. आशिफ व सोनू खान बताते हैं कि पूर्व की घटनाओं को लेकर कारोबारी सचेत है। सुरक्षा की पूरी व्यवस्था की गई है। प्रशासन की टीम लगातार निरीक्षण करती रहती है। बताया कि पटाखे का कारोबार सीजनल है।

पिछला साल था लकी, इस बार टकटकी
सरैयागंज पटाखा मंडी के लिए कारोबार के लिहाज से पिछला साल लकी था। चुनाव और लगन के कारण अच्छा खासा कारोबार हुआ था। इस साल लगन के पहले ही कोरोना की धमक से बाजार बंद हो गया। लॉकडाउन में दो माह से अधिक समय तक बाजार-दुकान बंद रहा। अनलॉक-1 में छह दिन से पटाखा मंडी खुल रही है। लेकिन, दुकानदारों को टकटकी लगी है। कई दुकानदारों की तो अब तक बोहनी भी नहीं हो सकी है। 30 जून को आखिरी लगन है। नवंबर-दिसंबर में भी लगन कम ही है। पटाखा दुकानदार अनवर ने बताया कि अब दीपावली से उम्मीद है। इसके बाद साल 2021 में ही कारोबार संभलेगा।



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