BIHARBreaking NewsInternationalSTATE

Lockdown में अमानवीयता, नेपाल में फंसे 125 भारतीय प्रवासियों को मकान मालिकों ने घर से निकाला…

नेपाल में पश्चिम चंपारण के 125 प्रवासी मजदूर फंसे हुए हैं। कई को मकान मालिकों ने घर से निकाल दिया है। सभी 28 मई को नेपाल से चले, लेकिन वाल्मीकिनगर सीमा पर नेपाली पुलिस ने यह कहकर रोक दिया कि अभी भारत में प्रवेश पर पाबंदी है। पिछले पांच दिनों से ये लोग भ’टक रहे। इनके घरवालों ने मुख्यमंत्री से सहयोग के लिए गुहार लगाई है।

दुकानों व कारखानोंं में करते मजदूरी

योगापट्टी प्रखंड की बहुअरवा पंचायत की बंगाली कॉलोनी निवासी राजेंद्र कुमार, राजू दास, रीना देवी, बलराम दास, दीपक आशा देवी और रविंद्र सहित 125 लोग वर्षों से नेपाल में रहते हैं। वे वहां के बुटवल स्थित देवीनगर, जानकीनगर, शंकरनगर, शीतलनगर और ठुठी पीपल आदि जगहों की दुकानों व कारखानोंं में मजदूरी करते हैं। कोरोना के चलते हुए लॉकडाउन में काम बंद होने से सभी किराये के कमरों में कैद हो गए थे। तकरीबन ढाई माह में जमा-पूंजी खत्म होने और काम शुरू नहीं होने पर सभी भारत के लिए चले।

नेपाली पुलिस ने भारत में प्रवेश करने से रोका

वाल्मीकिनगर सीमा पर नेपाली पुलिस ने भारत में प्रवेश करने से रोक दिया। अधिकारियों से आरजू-मिन्नत के बाद भी उन्हें जाने नहीं दिया गया तो बुटवल लौट गए। वहां पहुंचने पर मकान मालिकों ने घर में घुसने नहीं दिया। कई के सामान निकालकर फेंक दिए। मकान मालिकों का कहना था कि पूरे दिन कहां-कहां से घूमकर आए हैं। किस-किस से मिले हैं। इससे कोरोना फैल जाएगा।

200 रुपये भाड़ा खर्च भी बेकार

प्रवासी टुनटुन दास, रमेश दास व संजय दास ने बताया कि प्रति मजदूर 200 रुपये बस भाड़ा देकर सीमा पर पहुंचे थे। अब तो कोई आश्रय नहीं रहा। भोजन का भी इंतजाम नहीं हो पा रहा। परेशान प्रवासियों के स्वजन लखन दास, अभिलाष दास, मदन दास व मोहन दास ने बताया कि अधिकारियों और सरकार को मदद के लिए आगे आना चाहिए। बहुअरवा पंचायत के वार्ड सदस्य जय किशन दास ने बताया कि मदद के लिए मुख्यमंत्री को मेल से आवेदन भेजा गया है।

जोगबनी और रक्सौल बॉर्डर खुल चुका

अपर समाहर्ता सह वरीय प्रभारी पदाधिकारी, प्रवासी श्रमिक कोषांग नंदकिशोर साह ने बताया कि नेपाल में फंसे भारतीयों के लिए जोगबनी और रक्सौल बॉर्डर खुल चुका है। प्रवासी उस रास्ते से आसानी से आ सकते हैं। प्रशासन उन्हें हर तरह की सहायता पहुंचाने को तैयार है।

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.