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आध्यात्मिक एवं मानसिक सदाचार क्या है? जानें…

आध्यात्मिक एवं मानसिक सदाचार क्या है?


करूणा दा ( मुखर्जी ) —- शारीरिक सदाचार की बात तो समझता हूँ । किन्तु आध्यात्मिक एवं मानसिक सदाचार क्या है ?

आध्यात्मिक सदाचार ::——

श्रीश्रीठाकुरजी :— गीता में है, एक भक्तिविशिष्यते। वहीं एकभक्तिपरायणता अर्थात् अकाट्य इष्टप्रतिष्ठा ही आध्यात्मिक सदाचार है , वह तुम्हें कभी किसी प्रकार भी न छोड़ सके । वह तुम्हारे प्रति पग पर चलने के साथ ही लगा रहना चाहिए । यदि इस रूप में तुम्हारी सत्ता की चलमानता के साथ जड़ित रहे, तो समझा जायेगा तुम आध्यात्मिक सदाचार अवलंबन कर चल रहे हो ।

मानसिक सदाचार ::—–

मानसिक सदाचार है मन के कुभाव को ignore ( उपेक्षा) कर या mould ( नियंत्रण ) कर बचने – बढ़ने की दिशा में अर्थात् इष्टस्वार्थ प्रतिष्ठा की दिशा में चलना।
नींव ::——
आध्यात्मिक सदाचार की नींव पर मानसिक एवं शारीरिक सदाचार की नींव देनी होगी । पुनः शारीरिक सदाचार न रहने पर मानसिक एवं आध्यात्मिक सदाचार पक्का नहीं होता है ।

इसीलिए आचार – नियम ::—-

भोजन इत्यादि के विषय में खूब सावधान रहना चाहिए । जो – सो खाना, जिसके – तिसके हाथ का खाना, अच्छा नहीं है। उससे शरीर – मन गिर जाता है । इस मामले में मात्रानुसार युक्ति – विचार समन्वित कट्टरता भी अच्छी होती है । यदि तुमलोग सोलह आने करोगे तो तुमलोगों का परिवेश भी दो पैसे करेगा ही। तुमलोगो को ऐसा त्रुटिरहित भाव से चलना चाहिए, करना चाहिए, जिससे उसका fraction ( भग्नांश ) करने पर भी समाज की क्षति नहीं हो ।

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