गाना गाकर मस्तिष्क ज्वर और कोरोना के प्रति लोगों को कर रही जागरुक प्रथम स्वास्थ्य सिपाही
- मोतीपुर प्रखंड के वार्ड नम्बर 9 की आशा है सुनैना
- अपने बनाए गीतों से लोगों को कर रहीं जागरुक
मुज़फ़्फ़रपुर / 21 मई
आशा दीदी आइल बाटे मस्तिष्क ज्वर के करेले परचरवा, दीदी हे राते कहनी बाबू सब के उपासे न सुतइहा…. यह लाइन किसी प्रचार गाड़ी का नही बल्कि मोतीपुर प्रखंड के वार्ड 9 की आशा सुनैना देवी की है। हंसते, मुस्कराते और गाते हुए जागरुकता फैलना इनकी आदत में शुमार है। सुनैना कहती है इस तरह से लोगों का ध्यान भी उनकी तरफ जाता है और बातों को भी मनन से सुनते हैं। कोरोना और मस्तिष्क ज्वर दोनो के लिए इनके पास गीत हैं, जिसके शब्दों और लय को इन्होंने ही पिरोया है। इनका कहना है कि यह सुबह 6 बजे ही लोगों को जागरुक करने निकल जाती हैं। लोगों के घरों में जाकर गीत गाने लगती हैं जिससे आस-पास के लोग भी जमा हो जाते हैं। बच्चे तो काफी ध्यान से इनकी गीतों को सुनते हैं। सुनैना देवी की कहानी यही खत्म नहीं होती। यह इसके अलावे अपने काम में जितनी तत्पर दिखती है उसकी हम सबों को भी आवश्यकता है। यह वाक्य इनके इस वाकये से पता लगती है। वह कहती हैं दो सााल पहले वह अपने क्षेत्र में भ्रमण पर थी। तभी उन्हें काफी भीड़ दिखी, पास जाकर देखा तो एक बच्चा अपनी आंखे बुखार के कारण तरेर रहा था। उसके अभिभावक रो रहे थे। यह सारा माजरा समझ चुकी थी। बच्चे को दादी की गोद से लिया और पेड़ की छांह में उसे सुला ताजे पानी की पट्टी देने लगी। कुछ ही देर मे उस बच्चे ने आंखें अच्छे से खोल दी। सुनैना ने उस गांव के डाॅक्टर को भी फटकार लगायी , जो उस बच्चे का ईलाज कर रहा था। यह तो एक कहानी है। ऐसे ही कुछ कहांनियों में सुनैना ने घर में हो रहे असुरक्षित प्रसव को भी सुरक्षित किया। वह कहती हैं जब भी पीएचसी जाती थी एएनएम दीदी के साथ प्रसव कक्ष में उसके तरीकों को देखती थी और शंका होने पर पूछती थी। सुनैना मात्र आंठवी तक पढ़ी हैं। पर स्वाभिमान ऐसा कि अपने सारे कागजी कार्रवाई वह खुद करती हैं। घर से उनका नाता सिर्फ खाने और सोने से है। 2006 से आशा के रुप में चयन हुआ है तब से वह इसे अपना धर्म मान बैठी हैं। इस संबंध में डीसीएम राजकिरण कहते हैं कि उनका अंदाज और कार्यशैली काफी अच्छा हैं। इस कारण वह अपने क्षेत्र में काफी प्रसिद्ध भी हैं।

सुनैना कहती हैं कि उन्हें मुखिया जी ने बोला कि तुम्हारा वार्ड 9 है तो तुम और वार्डों में क्यों जागरुक करती हो? इस पर मैंने कहा कि आप उन सभी वार्ड में आशा की नियुक्ति करवाइये मैं छोड़ देती हूं जाना। मुझे उन वार्डों मे जाने से कोई दि’क्कत नहीं है। अपने गीत गाने की आदत के बारे में कहती हैं कि बचपन से ही शादी और विवाहों मे गीत गाने का शौक था सो इसमें भी आजमा कर देखा। मैंने पैसों के लिए यह काम कभी नहीं किया। अब अपने इस व्यवहार के कारण इतनी प्रसिद्ध हो चुकी हैं कि मोतीपुर से ही गाड़ी वाले इनका पता बता देगें।



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