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लॉकडाउन को लेकर बैरगनिया की सड़को पर दौड़ने वाले टमटम घोड़ो व उसके चालकों की हालत द’यनीय हो गयी है…

सीतामढ़ी. बैरगनिया: कोरोना संक्रमण को लेकर जारी लॉक डाउन व इंडो-नेपाल बॉर्डर सील होने के कारण बैरगनिया की सड़को पर दौड़ने वाले टमटम के घोड़ो व उसके चालकों की हालत दिन प्रतिदिन दयनीय होती जा रही है. जो लोग टमटम चलाकर खुशहाल थे आज उन टमटम चालको के सामने अपनी व परिवार की भूख मिटाने के साथ साथ घोड़ो का चारा जुटाना भी भारी पड़ रहा है. बैरगनिया स्टेशन से नेपाल के गौर बस पार्क के साथ साथ ग्रामीण क्षेत्र के अलग अलग गांव तक टमटम की सवारी पहले से प्रसिद्ध है. 2012 में बैरगनिया पहुंचे तत्कालीन आईजी व वर्तमान डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने सड़को पर भारी संख्या में सज्जे धज्जे टमटम को देख कर पूरे शहर की यात्रा टमटम से की थी. यहां से नेपाल जाने वाले पर्यटक प्रदूषण मुक्त टमटम से ही सवारी करना पसंद करते है. टमटम की आकर्षक सजावट व उसमे सज्ज धज्ज कर जूते घोड़ो को देख सवार उसकी सवारी करना ही पसंद करते है. प्रखंड के नन्दवारा गांव के तांगा टोला में इस समय 40 ऐसे परिवार है जिनका जीवन यापन टमटम से ही होता है. यहां 60 से 70 बेहतर नश्ल के घोड़े है. इस गांव के टमटम चालक प्रतिदिन बैरगनिया-गौर के बीच टमटम चलाने के साथ साथ अब शादी-विवाह में दूल्हा की सवारी के लिये रथ व घोड़ो का भी इंतजाम करते है. जिससे उनकी सालाना अच्छी खासी कमाई भी हो जाती है. नन्दवारा तांगा टोला के टमटम चालक मो मुन्ना ने बताया कि लॉक डाउन के कारण उसे 50 शादी-विवाह जाने में जाने वाले सट्टा को रद्द करना पड़ा है.

उसके पास छह घोड़े है वही चार रथ भी है. प्रत्येक सट्टा 20 से तीस हजार के बीच था. सट्टा रद्द होने के साथ साथ प्रतिदिन चलने वाली टमटम भी बन्द है. परन्तु परिवार का खर्च व घोड़ो की चारा की किल्लत का सामने इन दिनों उन्हें करना पड़ रहा है. बताया कि जिस एक घोड़ा के चारा पर प्रतिदिन करीब दो सौ रुपये का खर्च होता था उस पर इस समय मात्र 40 से 50 रुपये का भूसा व चोकर का खर्च हो रहा है. एक महीने के भीतर उनके घोड़े की सेहत गिर कर आधी हो गयी है. उनके सामने परिवार को बचाने के साथ साथ अपने घोड़ो को बचाने की भी चुनौती है. बताया कि उसके पास एक एक लाख मूल्य के छह घोड़े है. यही हाल टमटम चालक मो रुस्तम, मो आसिफ, मो अकबर, मो असरफ व मो राजू समेत सभी टमटम चालको की है. टमटम चालको ने सरकार से घोड़ो व अपने परिवार को आर्थिक तंगहाली से बचाने की मांग की है.
फोटो- नन्दवारा गांव में भूसा खाता घोड़ा व रथ में जूते घोड़े

सीतामढ़ी से सरोज कुमार गुप्ता की रिपोर्ट

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