बक्सर: शराबबंदी कानून को वापस करने की मांग के बीच अब पूर्व केंद्रीय मंत्री पशुपति पारस ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को घेरने के लिए बड़ा दांव चला है. उन्होंने सरकार से ताड़ी को कृषि का दर्जा देने की मांग की है.
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आरएलजेपी चीफ ने आरोप लगाया कि ताड़ी उतारने और बेचने पर रोक लगाने के कारण पासी समाज की माली हालत लगातार बिगड़ती जा रही है, लिहाजा सरकार को दिशा में फौरन कदम उठाना होगा.

ताड़ी उतारना और बेचना मौलिक अधिकार’: रविवार को बक्सर जिले के डुमरांव अनुमंडल अंतर्गत कोरानसराय में लोगों को संबोधित करते हुए आरएलजेपी अध्यक्ष पशुपति पारस ने कहा कि पेड़ से ताड़ी उतारना और उसे बेचना, पासी समाज का मौलिक अधिकारी है लेकिन बिहार सरकार ने शराबबंदी के तहत इस पर प्रतिबंध लगा दिया है. उन्होंने कहा कि सरकार का यह फैसला पासी समाज के हितों के साथ-साथ उसके मौलिक अधिकार के भी खिलाफ है.

‘बच्चियों की शादी नहीं हो पा रही है’: पूर्व केंद्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस ने कहा कि ताड़ी उतारने और बेचने पर लगी रोक के कारण पासी समाज के परिवार के लोग भुखमरी की कगार पर आ गए हैं. उन्होंने कहा कि इस वजह है बच्चियों की शादी नहीं हो पा रही है, बच्चे पढ़-लिख नहीं पा रहे हैं.

ताड़ी को मिलना चाहिए कृषि का दर्जा: इसके साथ ही पशुपति पारस ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से ताड़ी को कृषि का दर्जा देने की मांग की है. उन्होंने कहा कि बिहार सरकार से उनकी मांग है कि ताड़ी को कृषि का दर्जा देकर शराबबंदी से उसे अलग कर दिया जाए और फिर से उसे बेचने की अनुमति दी जाए.


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