पटना. महाकुंभ अब अपने अंतिम दिनों में है. कल महाशिवरात्रि है और ऐसे में प्रयागराज जाने वालों की भीड़ लगातार पटना जंक्शन पर जुट रही है. ट्रेनें आ रही हैं, चढ़ने के लिए धक्का-मुक्की हो रही है और ट्रेन खुल जा रही है. लेकिन, प्लेटफॉर्म पर यात्रियों की संख्या कम नहीं हो रही. महाकुंभ में संगम स्नान को लेकर लोगों में इतना उत्साह है कि उन्हें बाथरूम में भी एसी जैसी फिलिंग आ रही है. ट्रेन के अंदर बैठे लोग कहते हैं कि जगह नहीं है, जबकि बाहर खड़े लोग कहते हैं कि बहुत जगह है. प्रयागराज जाने वाली हर ट्रेन की यही कहानी है.

शौचालय में खड़े हाेकर प्रयागराज जा रहे लोग

महाकुंभ में जाने के लिए लोगों के अंदर ऐसी दीवानगी शायद ही कभी देखने को मिली होगी. लोग सुबह से बिहार के कोने कोने से आकर पटना जंक्शन पर जुटे हुए हैं. प्रयागराज होकर कहीं भी जाने वाली ट्रेन में सिर्फ भीड़ ही भीड़ देखने को मिलती है. प्लेटफॉर्म पर ट्रैक को छोड़ दोनों तरफ सिर्फ लोग ही लोग दिखाई दे रहे हैं. जैसे ही ट्रेन रुकती है, अंदर घुसने के लिए धक्का-मुक्की शुरू हो जाती है. यही तस्वीर देखने मिली कामाख्या से खुलकर प्रयागराज होकर दिल्ली जाने वाली ब्रह्मपुत्र मेल की. कई लोग बाथरूम में बैठकर सफर कर रहे थे. लोकल 18 ने जब उनसे कारण पूछा तो एक यात्री ने बताया कि पुण्य कमाने जा रहे हैं, जहां सीट मिल जाए बस प्रयागराज जाना है. शौचालय में भी थर्ड एसी वाली फीलिंग आ रही है. बोगी में तो पैर रखने की भी जगह नहीं है. यहां तो कम से हवा तो आ रही है ना.

धक्का-मुक्की के बीच यात्रियों का फूटा गुस्सा
प्लेटफॉर्म पर एक यात्री गुस्से से तिलमिला रहे थे. लोकल 18 ने उनसे गुस्सा होने का कारण पूछा तो उन्होंने कहा कि सब कोई कुंभ नहा लिया. सरकार कह रही है कि आईए-आईए, अरे कैसे आएं. इंजन से लेकर बोगी तक देख लिए कहीं जगह नहीं मिला. कई गाड़ी को कैंसिल कर दिया गया. पब्लिक किसी तरह से लटक कर भी सफर कर रही है. उन्होंने आगे कहा कि धक्का-मुक्की में लोगों को चोटें आ रही हैं. किसी का मोबाइल गिर जा रहा है, किसी का सर फट जा रहा है, लेकिन देखने वाला कोई नहीं है. तीर्थ करने के लिए बुला रहे हैं तो व्यवस्था दीजिए ना. एक महिला यात्री ने कहा कि सीट तो मिल गई है, लेकिन बहुत दिक्कत हो रही है. स्पेशल ट्रेनों की संख्या को बढ़ाना चाहिए था. जो ट्रेनें है, उसे भी रद्द कर दिया जा रहा है. असम से जनरल कोच में बैठ कर कुंभ जा रही हूं. हर जगह से लोग चढ़ रहे हैं. पैर रखने की भी जगह नहीं है





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