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एआईडीएसओ के 71वें स्थापना दिवस कार्यक्रम का आयोजन, जानें…

धर्मनिरपेक्ष, वैज्ञानिक और जनवादी शिक्षा के बिना एक बेहतर समाज का निर्माण संभव नहीं है। नवजागरण और आजादी आंदोलन के तमाम मनीषियों एवं क्रांतिकारियों ने ऐसी शिक्षा व्यवस्था के लिए संघर्ष किया था। इन मनीषियों और क्रांतिकारियों के सपनों को साकार करने के लिए एआईडीएसओ अपनी स्थापना के समय से ही संघर्षरत है। ये बातें एलएस कॉलेज के आचार्य जे.बी. कृपलानी सभागार में एआईडीएसओ के 71वें स्थापना दिवस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संगठन के केंद्रीय परिषद के कार्यालय सचिव प्रशांत कुमार ने कहीं। उन्होंने कहा कि क्रांतिकारियों के जीवन, संघर्ष और आदर्शों से प्रेरित छात्र आंदोलन ही वर्तमान संकटग्रस्त समाज को नई दिशा दे सकता है।

कार्यक्रम की शुरुआत मोतीझील स्थित संगठन कार्यालय में ध्वजारोहण और महान मार्क्सवादी चिंतक कॉमरेड शिवदास घोष के चित्र पर माल्यार्पण से हुई। इसके पश्चात एक सुसज्जित जुलूस संगठन कार्यालय से निकलकर कलमबाग चौक होते हुए एलएस कॉलेज सभागार पहुंचा।

सभा को संबोधित करते हुए एलएस कॉलेज के हिंदी विभाग के सेवानिवृत्त प्राध्यापक डॉ. वीरेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि शिक्षा और संस्कृति पर शासक वर्ग द्वारा चौतरफा हमले किए जा रहे हैं। ऐसे समय में छात्रों को वैज्ञानिक और तार्किक दृष्टिकोण अपनाना होगा, और यह केवल सही शिक्षा और संगठित प्रयासों से ही संभव है।

एआईडीएसओ के केंद्रीय परिषद के कोषाध्यक्ष समसुल आलम ने कहा कि एआईडीएसओ न केवल छात्रों की विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए आंदोलनरत है, बल्कि छात्रों में इंसानियत और चरित्र निर्माण का भी प्रयास कर रहा है। सात दशकों के संघर्ष में यह संगठन देश के 29 राज्यों और 4 केंद्र शासित प्रदेशों में छात्रों के आंदोलन का मजबूत स्तंभ बन चुका है।

डॉ. कुमार विरल ने अपने गीतों के माध्यम से वर्तमान संकटग्रस्त समाज में छात्रों को एकमात्र उम्मीद बताया।

एआईडीएसओ के बिहार राज्य सचिव विजय कुमार ने कहा कि राज्य की वर्तमान शिक्षा व्यवस्था बदहाल और अराजकता की शिकार है। वहीं नई शिक्षा नीति 2020 के जरिए शिक्षा का संपूर्ण निजीकरण और व्यापारीकरण किया जा रहा है।

सभा में बीपीएससी अभ्यर्थियों पर लाठीचार्ज के खिलाफ और उनके न्यायसंगत आंदोलन के समर्थन में एक प्रस्ताव रखा गया, जिसे सर्वसम्मति से पारित किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष शिवकुमार ने की।
जुलूस का नेतृत्व अली अख्तर, अभिषेक कुमार, मोहम्मद अहमद, तरन्नुम खातून, निशांत कुमार, रौशन कुमार, किशन, खुशबू, दीपमाला, सुभाष, सौरभ, काजल, गणेश, सूरज, राजनंदनी, सचिन, श्याम कुमार, कोमल, शिवानी, तेजस्वी, अमितेश, संगम, सुधांशु सिंह, विवेक, रोहित आदि ने किया।

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