तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU) के बायोटेक्नोलॉजी के छात्र अब फफूंद लगे मक्के से एमाइलेज एंजाइम निकालने की तकनीक सीख रहे हैं। इसके बाद छात्र खुद का उद्यम लगाकर, फफूंद लगे मक्के से लाखों रुपये कमाएंगे।
वहीं, टेक्सटाइल, लेदर, डिटरजेंट, ड्रग आदि सेक्टर में भी उनके लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। यही नहीं मक्का उत्पादक किसानों को भी इसका काफी फायदा मिलेगा।
TMBU के छात्र सीख रहे तकनीक
फफूंद लगे मक्के से एमाइलेज एंजाइम निकालने की तकनीकी सीखने के बाद छात्र किसानों से फफूंद लगा मक्का भी खरीदेंगे, जिससे किसानों को फायदा होगा और उन्हें खराब मक्का फेंकना नहीं पड़ेगा। अभी किसानों को फफूंदी लगने के बाद मक्का फेंकना या जानवरों को चारे के रूप में खिलाना पड़ाता है।
प्रमुख मक्का उत्पादक राज्य
बिहार देश के प्रमुख मक्का उत्पादक राज्य के रूप में जाना जाता है। राज्य में कई मक्का उत्पादन वाले क्षेत्र बाढ़ प्रभावित भी हैं। बाढ़-बरसात के दिनों में मक्के की फसल डूब जाती है। अगर सड़क या छत पर मक्के को सूखाते हैं, तो इस दौरान भी नमी के कारण मक्का में फफूंदी लग जाती है। फफूंदी लगे मक्के को किसान या तो सड़क किनारे फेंक देते हैं या फिर मवेशी के आगे चारा के रूप में डाल देते हैं।टीएमबीयू के बायोटेक्नोलाजी विभाग के वरीय वैज्ञानिक सह प्रोफेसर डॉ. अजय कुमार चौधरी, शिक्षक डॉ. रोहित कुमार वर्मा, डॉ. ऋचा राय ने बताया कि शैक्षणिक सर्वेक्षण के दौरान यह पाया गया कि फफूंदी लगे मक्का में एसपरजीलियस नाइजर बड़ी मात्रा में पाया जाता है।
- डॉ. एके चौधरी ने कहा कि बायोटेक में हम कचरे से भी आमदनी प्राप्त कर सकते हैं।
- फफूंदी को प्रयोगशाला में अनुकूल वातावरण में कल्चर किया गया।
- उस फफूंदी से एमाइलेज एंजाइम निकाला गया।
- एमाइलेज एंजाइम की आद्यौगिक क्षेत्र में काफी मांग है।
- फूड प्रोसेसिंग, टेक्सटाइल, दवा उद्योग, चर्म उद्योग, डिटर्जेंट उद्योग, बेकिंग उद्योग, ब्रेविंग उद्योग, पेपर उद्योग, फार्मास्यूटिकल कंपनी में एमाइलेज एंजाइम की काफी डिमांड है।
- इन सभी उद्योगों में एमाइलेज एंजाइम की काफी खपत होती है।
- ऐसे उद्योगों में इस्तेमाल के लिए एमाइलेज बनाने वाली कंपनी से एमाइलेज खरीदा जाता है या फिर इसे प्रद्यौगिक जानकारों या बायोटेक्नोलॉजिस्ट को नियुक्त कर उत्पादन किया जाता है।







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