दीपक कुमार। गायघाट
गायघाट। संतान की लंबी आयु एवं परिवार की उन्नति के लिए गुरुवार को डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर हजारों व्रतियों ने छठी मइया का पूजन किया। सूर्य उपासना के इस महापर्व के लिए प्रखण्ड के विभिन्न तालाबों एवं जलाशयों के किनारे हजारों श्रद्धालु जुटे।
बागमती नदी के घाट पर व्रतियों के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे। छठ महापर्व आयोजन समिति महादेव छठ माता की महिमा और सूर्य देव की अराधना से संबंधित गीत-संगीत ने श्रद्धालुओं को भक्ति से सराबोर किया। यहां व्रतियों ने डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर छठी माता की पूजा की। साथ ही ईश्वर से सुख-शांति की कामना की। शुक्रवार की सुबह चढ़ते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही छठ माता की विधि-विधान से पूजन होगी। सूर्य को अर्घ्य देने के बाद भक्तजन प्रसाद ग्रहण करेंगे।
साथ ही तीन दिन से उपवास करने वाले व्रती भी अन्न-जल ग्रहण करेंगे। इसे पारण कहा जाता है। कार्तिक शुक्ल षष्ठी यानी व्रतियों ने छठ प्रसाद में ठेकुआ, टिकरी व चांवल के लड्डू बनाए। शाम के समय एक बांस की टोकरी में अर्घ्य देने वाले सूप को सजाया गया। व्रती पैदल ही सूर्य को अर्घ्य देने घाट पहुंचे। सूर्य को जल और दूध से अर्घ्य देकर छठी मइया की सूप से पूजा की गई। चढ़ते सूर्य को व्रती अर्घ्य देंगे। इसके बाद महिलाएं अपने-अपने घरों में पूजा करेंगी। फिर उपवास तोड़ेंगी। इसके बाद 4 दिवसीय छठ महापर्व का समापन होगा।








Leave a Reply