चमकी पर निजी चिकित्सकों को मिला ऑनलाइन प्रशिक्षण
- प्रशिक्षण के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का रखा गया ख्याल
- गाइडलाइन के अनुसार उपचार का दिया गया निर्देश
- शहर के नीजी चिकित्सकों को समुचित तैयारी का मिला निर्देश
वैशाली। 30 अप्रैल
चमकी बु’खार के प्रभावी तैयारियों को लेकर सदर अस्पताल के द्वारा गुरुवार को निजी बाल रोग विशेषज्ञों तथा जेनरल फिजीशियन को जूम ऐप के द्वारा एईएस संबंधी ऑनलाइन प्रशिक्षण दी गई। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य नीजी चिकित्सकों को एईएस संबंधी जानकारी के साथ एईएस का उचित ईलाज करने की जानकारी देनी थी। जिले में अक्सर यह देखा गया था कि चमकी के केस में बहुत से अभिभावक नीजी नर्सिंग होम या अस्पतालों में लेकर बच्चों को जाते थे। उचित ईलाज की जानकारी के आभाव में बच्चाों को जान का खतरा बना रहता था। इस प्रशिक्षण के माध्यम से अब वह चमकी को उसके लक्षणों के आधार पर समझ पाने के साथ उसका उपचार भी करेगें। गंभीर मामलों में वह उसे सरकारी अस्पताल में रेफर भी कर पाएगें। यह प्रशिक्षण केयर के डाॅ नीरज तथा संचारी रोग रोकथाम नियंत्रण पदाधिकारी डाॅ सत्येन्द्र ने दी। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने चिकित्सकों को चमकी के लक्षण को पहचानने के बारे में बताया वहीं डाॅ नीरज ने राज्य स्वास्थ्य समिति के द्वारा उपचार की विधियों की विस्तृत जानकारी दी।

गाईडलाइन के तहत ही करना होगा उपचार
डाॅ सत्येन्द्र ने प्रशिक्षण के दौरान कहा कि चमकी मरीज के लिए सबसे कीमती उसका समय होता है। जितनी जल्दी उसका ईलाज शुरु हो सके उतना ही अच्छा है। अगर कोई मरीज उनके यहां भर्ती होता है। तो लक्षणों के आधार पर सबसे पहले उसे आरएन का स्लाइन चढ़ाएं। चूंकि अधिकतार मामलों में बच्चों का ग्लूकोज लेवल कम होता है तो उसका ग्लूकोज लेवल भी मापना होगा। वहीं कम रहने पर ग्लूकोज भी चढ़ाना होगा। अगर रेफर की आवश्यकता होगी तो उसे रेफर करने में वह कोई संकोच न करंे।
लक्षणः अचानक तेज बु’खार आना ए मुंह से झाग आनाए सुस्ती
क्या करेंः चीनी और नमक का घोल तुरंत दें। ओआरएस देंए तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल लेकर जाएं। मुफ्त एबुंलेंस सेवा के लिए 102 डाॅयल करें।
क्या न करेंः ओझा गुणी के पास न ले जाएं। झाड़ फूंक न कराएं। अस्पताल लेकर जाने में देरी न करें। झोला छाप डाक्टर के पास बिल्कुल न जाएं।



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