कोरोना वायरस के मरीजों को बचाने के लिए एक दवा का ट्रायल जल्द शुरू होने वाला है. सबसे पहले इसकी शुरुआत पोस्टग्रैजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGIMER) चंडीगढ़ में होगी. इस दवा का ट्रायल एम्स दिल्ली और एम्स भोपाल में भी किया जाएगा. आइए जानते हैं कि आखिर कौन सी है ये दवा?
इस दवा का नाम है द माइकोबैक्टीरियम डब्ल्यू (Mw) वैक्सीन. मेडिकल साइंस की भाषा में यह वैक्सीन नहीं है, बल्कि एक सहायक दवा है, जो शरीर में होने वाली सेप्सिस को रोकती है.
पीजीआई के प्रवक्ता ने रविवार को कहा था कि पीजीआई प्रबंधन ने Mw वैक्सीन के ट्रायल का फैसला लिया है. इससे हम कोविड-19 कोरोना वायरस से पीड़ित मरीजों के इलाज में उपयोग करेंगे। प्रवक्ता ने बताया कि Mw वैक्सीन को लेकर पहले से एक स्टडी चल रही थी. यह ICU में भर्ती कोरोना वायरस के गंभीर मरीजों को दिया जाएगा. ताकि कोरोना वायरस की वजह से उनके शरीर में गंभीर स्तर का सेप्सिस न हो.
कोरोना के ज्यादातर मरीज साइटोकाइन स्टॉर्म की वजह से मारे जा रहे हैं. जब हमारे शरीर का इम्यून सिस्टम खुद ही शरीर को नुकसान पहुंचाने लगता है तो उसे साइटोकाइन स्टॉर्म कहते हैं. इससे सेप्सिस, मल्टीऑर्गन फेल्योर जैसी दिक्कत होती हैं. अंत में मरीज मर जाता है. इसे रोकने में Mw वैक्सीन मदद करेगी.
जानिए क्या होता है साइटोकाइन स्टॉर्म?
PGI चंडीगढ़ में शुरू होगा कोरोना मरीजों को बचाने वाली ‘वैक्सीन’ का ट्रायल
पीजीआई के प्रवक्ता ने बताया कि हमने देखा है कि Mw वैक्सीन की वजह से शरीर में होने वाला सेप्सिस, मल्टीऑर्गन फेल्योर, साइटोकाइन स्टॉर्म कम हो जाता है. इससे कोरोना वायरस मरीजों के मृत्युदर में कमी आएगी.



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