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अब लिफ्ट में बैठकर 40 दिन में मंगल ग्रह पर पहुंच जाएगा इंसान, यह कंपनी कर रही कमाल, कब से शुरू?

क्या ऐसी कोई लिफ्ट कभी संभव है, जिससे इंसान अंतरिक्ष में जा सकेगा? क्या सच में लिफ्ट के जरिए महज कुछ दिनों में इंसान अपने सामानों के साथ आसमान में जा सकता है? आज के वक्त में साइंस और टेक्नोलॉजी ने जिस तरह से खुद को डेवलप किया है, उस हिसाब से यह असंभव नहीं है. अभी तक भले इंसान स्पेसक्राफ्ट से अंतरिक्ष में जाता है, मगर बहुत जल्द लिफ्ट में बैठकर अंतरिक्ष की सैर कर सकेगा. जी हां, जापान की कंपनी ओबायशी एक ऐसी लिफ्ट (स्पेस एलिवेटर) बना रही है, जो हमें रिकॉर्ड समय में मंगल ग्रह तक पहुंचा देगी.

जापानी कंपनी ओबायशी कॉर्पोरेशन स्पेस एलिवेटर बनाने पर काम कर रही है. स्पेस एलिवेटर प्लान पर काम कर रहे ओबायशी से जुड़े योजी इशिकावा ने कहा कि कंपनी फिलहाल रिसर्च, रफ डिजाइन, पार्टनर्शिप बिल्डिंग और प्रमोशन के काम में लगी हुई है. मंगल ग्रह तक पहुंचने में अभी छह से आठ महीने तक का समय लगता है. मगर अब वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया है कि अंतरिक्ष एलिवेटर हमें तीन से चार महीने या यहां तक कि 40 दिनों में स्पेस में पहुंचा सकता है. ओबायशी कॉर्पोरेशन ने पहली बार 2012 में स्पेस लिफ्ट के लिए अपनी योजना की घोषणा की थी.

कंपनी का क्या है प्लान?
कंपनी का कहना है कि वह साल 2025 में 100 बिलियन डॉलर की परियोजना पर निर्माण शुरू करेगी. और साल 2050 तक लिफ्ट से स्पेस तक ऑपरेशन शुरू हो सकता है. हालांकि, इशिकावा का मानना है कि कंस्ट्रक्शन का काम अगले साल से शुरू नहीं होगा. ओबायशी की मानें तो सीधी रेखा में चुंबकीय मोटर से चलने वाली रोबोटिक कारों को नवनिर्मित स्पेस स्टेशन तक ले जाया जाएगा. इस लिफ्ट में लोगों को सामान के साथ ले आया और ले जाया जाएगा. हालांकि, कुछ एक्सपर्ट्स को संदेह है कि क्या ऐसी संरचना संभव भी है. क्रिश्चियन जॉनसन ने पिछले साल पीयर-रिव्यू जर्नल ऑफ साइंस पॉलिसी एंड गवर्नेंस में स्पेस लिफ्ट को लेकर एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी. उन्होंने कहा कि यह एक तरह का अजीब विचार है. ऐसा कहा जाता है कि कुछ लोग हैं, जो वास्तव में वैज्ञानिक हैं. जो वास्तव में इसके साथ हैं और वास्तव में इसे साकार करना चाहते हैं.

स्पेस लिफ्ट है फायदेमंद
अगर स्पेस एलिवेटर यानी अंतरिक्ष लिफ्ट का कॉन्सेप्ट सच साबित होता है तो यह एक क्रांतिकारी डेवलपमेंट होगा. पहली बात तो यह कि इस लिफ्ट से आने-जाने में लगने वाली लागत अंतरिक्ष में पेलोड भेजने की लागत से भी कम होगी. दूसरी बात यह कि इससे पर्यावरण को भी अधिक नुकसान नहीं होगा, जितना कि पेलोड से होता है. रॉकेट में बड़ी मात्रा में ईंधन की आवश्यकता होती है. रॉकेट से काफी मात्रा में उत्सर्जन भी होता है. मगर यह स्पेस लिफ्ट सामान या यात्रियों को केबल के साथ लाने-ले जाने के लिए इलेक्ट्रिक मोटर्स का यूज कर सकती है. यह अंतरिक्ष आने-जाने का सबसे अधिक टिकाऊ और किफायती विकल्प होगा.

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