बिहार सरकार ने बिहार के बाहर फंसे लोगों को वापस लाने से मना कर दिया है. बिहार सरकार ने कहा है कि 17 लाख लोग बिहार के बाहर फंसे हुए हैं लेकिन हम लॉकडाउन के नियमों के तहत फंसे हुए हैं इसलिए फिलहाल उनलोगों का लाना संभव नहीं है.
कोटा में भूख हड़ताल पर बैठे स्टूडेंट्स
बिहार सरकार के इस फैसले के बाद अब कोटा के छात्र घर वापसी के लिए भूख हड़ताल शुरू कर दिया है.छात्रों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से अपने घर जाने के लिए बसें भेजने की अपील की है. ये छात्र अपने हॉस्टल्स में हाथों में तख्तियां लेकर बिहार सरकार से घर बुलाने और परिवार के साथ रहने के लिए निवेदन कर रहे हैं. गांधी जी के सिद्धान्तों को दर्शाते हुए छात्र बुरा न देखो, बुरा न सुनो, बुरा न बोलो का संदेश भी दे रहे हैं क्योंकि देश में उनकी आवाज नहीं सुनी जा रही है.
छात्र हॉस्टल्स में ही रहकर उपवास कर रहे हैं और इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पालन भी कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह सब अपनी आवाज बिहार सरकार तक पहुंचाने के लिए कर रहे हैं ताकि वे जल्द घर जा सकें। उन्होंने कहा कि कई दूसरे राज्यों के छात्र यहां से अपने घर जा चुके हैं ऐसे में हमें भी यहां से ले जाने की व्यवस्था की जाए। हालांकि, बिहार सरकार ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि कोटा से छात्रों को लाना फिलहाल संभव नहीं है।
कुछ दिन पहले इन छात्र-छात्राओं को ध्यान में रखते हुए नीतीश कुमार ने अपील की कि वह लॉकडाउन का पालन करें और जो लोग जहां हैं वहीं पर ठहरे रहें। उन्होंने कहा, “कोटा में पढ़ने वाले छात्र संपन्न परिवार से आते हैं। अधिकतर अभिभावक अपने बच्चों के साथ रहते हैं, फिर उन्हें क्या दिक्कत है। जो गरीब अपने परिवार से दूर बिहार के बाहर हैं फिर तो उन्हें भी बुलाना चाहिए। लॉकडाउन के बीच में किसी को बुलाना नाइंसाफी है। इसी तरह मार्च के अंत में भी मजदूरों को दिल्ली से रवाना कर लॉकडाउन को तोड़ा गया था।”



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