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AES “चमकी बु’खार” को लेकर रुन्नीसैदपुर PHC का हुआ निरीक्षण, देखें तस्वीरें…

एईएस को ले रुन्नी सैदपुर पीएचसी का हुआ निरीक्षण

  • दो वर्षीय मस्तिष्क ज्वर पी’ड़ित बच्ची को एसकेएमसीएच में कराया गया भर्ती
  • बच्ची हाइपोग्लाइसीमिया से ग्र’सित

सीतामढ़ी। 22 अप्रैल
जिला संचारी रोग रोकथाम नियंत्रण पदाधिकारी डॉ रवीन्द्र कुमार यादव द्वारा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र रुन्नी सैदपुर के जेई वार्ड का निरीक्षण किया गया। वहीं एएनएम और आशा का उन्मुखीकरण भी किया गया ।
निरीक्षण में जेई वार्ड में सभी आवश्यक दवा एवं उपकरण उपलब्ध पाये गये ।वार्ड में प्रोटोकॉल भी लगे हुए थे ।
प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी द्वारा बताया गया कि एम्बुलेन्स में कुछ तकनीकी दिक्कत है । जिसे ठीक करने के लिए मुजफ्फरपुर भेज गया है। एम्बुलेंस के ठीक होने तक वैकल्पिक एम्बुलेंस की व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया है। विदित हो कि रुन्नी सैदपुर के रिक्सिया गाँव के मुबस्सिर जिया की 2 वर्षीय पुत्री मस्तिष्क ज्वर की चपेट में आ गयीं हैं। यह क्षेत्र जेई प्रभावित इलाके में आता है। मस्तिष्क ज्वर से पीड़ित बच्ची का इलाज श्री कृष्ण मेडिकल कॉलेज अस्पताल में चल रहा है ।विदित हो कि उस बच्ची का प्राथमिक उपचार सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र रुन्नी सैदपुर के बिल्कुल समीप एक निजी क्लिनिक में हुआ था । जिसे गंभीर अवस्था में मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेज दिया गया ।

वहां वह मस्तिष्क ज्वर पीड़ित निकली। उसमे हाइपोग्लाइसीमिया की कमी थी। जिला भी बी डी नियंत्रण पदाधिकारी डा रवीन्द्र कुमार यादव ने रुन्नी सैदपुर के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को स्थिति की गंभीरता से अवगत कराते हुए व्यवस्था में सुधार करने तथा व्यापक जागरूकता अभियान चला कर मस्तिष्क ज्वर की रोकथाम तथा प्राथमिक उपचार सुनिश्चित करने हेतु निदेशित किया ।
निरीक्षण के दौरान केयर इण्डिया के जिला संसाधन इकाई के टीम लीड मानस कुमार, स्वास्थय प्रबंधक संतोष कुमार तथा सामुदायिक उत्प्रेरक सुजीत कुमार साथ थे।
आशा रोज करेंगी सर्वे
केअर डिटीएल मानस सिंह ने बताया आशा को अपने क्षेत्र के 200 घरों पर पैनी नजर रखनी है। किसी भी बच्चे में चमकी के लक्षण दिखते ही उसे तुरंत नजदीकी पीएचसी भेजने की व्यवस्था करनी है। वही उसे अभिभावकों को तीन प्रमुख बातें बताने को कहा है जिसमें बच्चे को रात में भूखे न सोने देना, सुबह जल्दी उठना तथा लक्षण दिखते ही सरकारी अस्पताल ले जाना है।

क्या हैं चमकी बुखार के लक्षण?
चमकी नाम की बीमा’री में शुरुआत में तेज बुखार आता है.
इसके बाद बच्चों के शरीर में ऐंठन शुरू हो जाती है.
इसके बाद तंत्रिका तंत्र काम करना बंद कर देता है.
इस बीमा’री में ब्ल’ड शुगर लो हो जाता है.
बच्चे तेज बु’खार की वजह से बेहोश हो जाते हैं और उन्हें दौरे भी पड़ने लगते हैं.
जबड़े और दांत कड़े हो जाते हैं.
बुखार के साथ ही घबराहट भी शुरू होती है और कई बार कोमा में जाने की स्थिति भी बन जाती है.

अगर बु’खार के पी’ड़ित को सही वक्त पर इलाज नहीं मिलता है तो मौ’त तय है.

अगर चमकी बुखार हो जाए तो क्या करें?
बच्चों को पानी पिलाते रहे, इससे उन्हें हाइड्रेट रहने और बीमारियों से बचने में मदद मिलेगी.
तेज बुखार होने पर पूरे शरीर को ताजे पानी से पोछें.
पंखे से हवा करें या माथे पर गीले कपड़े की पट्टी लगायें ताकि बुखार कम हो सके.
बच्‍चे के शरीर से कपड़े हटा लें एवं उसकी गर्दन सीधी रखें.
बच्चों को पारासिटामोल की गोली व अन्‍य सीरप डॉक्‍टर की सलाह के बाद ही दें.
अगर बच्चे के मुंह से लार या झाग निकल रहा है तो उसे साफ कपड़े से पोछें, जिससे सांस लेने में दिक्‍कत न हो.
बच्‍चों को लगातार ओआरएस का घोल पिलाते रहें.
तेज रोशनी से बचाने के लिए मरीज की आंख को पट्टी से ढंक दें.
बेहोशी व दौरे आने की अवस्‍था में मरीज को हवादार जगह पर लिटाएं.
चमकी बु’खार की स्थिति में मरीज को बाएं या दाएं करवट लिटाकर डॉक्टर के पास ले जाएं.

अगर आपके बच्चे में चमकी बीमा’री के लक्षण दिखें तो

सबसे पहले बच्चे को धूप में जाने से रोकें.
बच्चा तेज धूप के संपर्क में आया तो उसे डिहाईड्रेशन की समस्या होगी, जिससे बीमारी की गंभीरता बढ़ती है.
बच्‍चों को दिन में दो बार स्‍नान कराएं.
गर्मी के समय बच्‍चों को ओआरएस अथवा नींबू-पानी-चीनी का घोल पिलाएं.
रात में बच्‍चों को भरपेट खाना खिलाकर ही सुलाएं.
चीनी-नमक का घोल, छाछ, शिकंजी के अलावा तरबूज, खरबूज, खीरे जैसी चीजों का खूब सेवन करें.

एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम से बचाव के लिए आपको अपने घर के आसपास सफाई रखनी चाहिए.

चमकी बुखार के लक्षण दिखने के बाद तुरंत उसकी पहचान करें और घर पर सावधानी बरतने के साथ ही इस तरह का कोई भी लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर के पास जाएं.

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