Shani Dev Puja Vidhi: शनिवार का दिन शनि देव को समर्पित है. शनिदेव को न्याय के देवता और कर्म फलदाता के नाम से भी जाना जाता है. कहते हैं कि व्यक्ति को उसके अच्छे-बुरे कर्मों का फल शनि देव देते हैं. अच्छे कर्म करने वालों को शुभ और बुरे कर्म करने वालों को अशुभ फलों की प्राप्ति होती है. ज्योतिष शास्त्र में शनि देव को क्रूर ग्रह माना गया है. लेकिन जब शनि देव प्रसन्न होते हैं, तो व्यक्ति को जीवन में ढेर सारी खुशियों की प्राप्ति होती है.
शास्त्रों में कहा गया है कि अगर शनि देव किसी पर मेहरबान होते हैं, तो उसके सारे कष्ट दूर हो जाते हैं. लेकिन कुछ गलत कर्म करने पर व्यक्ति को शनि के प्रकोप से नहीं बचाया जा सकता. ऐसे में हर व्यक्ति चाहता है कि उसे जीवन में शनि की क्रूर दृष्टि का सामना न करना पड़ा. लेकिन शनि देव की पूजा करते समय कुछ बातों का खास ख्याल रखना चाहिए.
जानें शनि देव की पूजा का सही समय
ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है कि शनि देव को शनिवार का दिन समर्पित है. कहा गया है कि सच्चे मन से शनि की अराधना करने से शनि देव प्रसन्न होते हैं और भक्तों पर जमकर कृपा बरसाते हैं. शास्त्रों में बताया गया है कि शनि देव की पूजा सूर्योदय से पहले या सूर्यास्त के बाद ही करनी चाहिए. इन दोनों समय पूजा करने से शनि देव बहुत जल्द प्रसन्न होते हैं.
इस समय भूलकर न करें शनि पूजा
शास्त्रों में बताया गया है कि शनि और सूर्य एक-दूसरे के विरोधी हैं. बता दें कि सूर्य उत्तर दिशा में विराजित हैं और शनि देव पश्चिम दिशा में. ऐसे में दोनों एक-दूसरे विपरित हैं. ऐसे में कहते हैं कि जब सूर्योदय होता है तो सूर्य की किरणें शनि देव की पीठ पर पड़ती हैं. ऐसे में इस समय शनि देव की पूजा स्वीकार नहीं की जाती.




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