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5 वर्ष तक के मूक- बधिर बच्चों की पहचान को लेकर शहरी प्रा० स्वा० केन्द्र में स्क्रीनिंग कैंप का आयोजन

बेतिया
श्रवण श्रुति योजना के अंतर्गत राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम टीम द्वारा शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र उत्तर बड़ी पोखरा बेतिया में मूक- बधिर बच्चों के लिए स्क्रीनिंग कैंप का आयोजन किया गया। उक्त कैंप में पूरे जिले से से आए 75 बच्चों की स्क्रीनिंग की गयी। जिसमें 35 बच्चों को डॉ एसएन मेहरोत्रा मेमोरियल ईएनटी फाउंडेशन कानपुर में कॉक्लियर
इमप्लांट के लिए रेफर किया गया। इस मौके पर सिविल सर्जन डॉ श्रीकांत दुबे ने बताया कि इस योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों का बिहार सरकार के द्वारा निःशुल्क चिकित्सा कराया जाता है। मौके पर मौजूद अपर प्रमुख चिकित्सा पदाधिकारी डॉ रमेश चंद्रा ने बताया कि कई बच्चों में जन्मजात बहरेपन और नहीं बोल पाने की समस्या होती है। इलाज में काफ़ी देरी होने के बाद इसका इलाज मुश्किल हो जाता है। जो आगे चलकर गंभीर व ठीक भी नहीं हो पाती है। ऐसे बच्चों की जानकारी होने पर माता- पिता को सरकारी अस्पताल में चिकित्सक से मिलकर समस्या को दिखाना चाहिए। उन्होंने बताया कि
बिहार सरकार मूक- बधिर बच्चों के इलाज के लिए श्रवण श्रुति योजना चला रही है। इसके जरिए अब 5 वर्ष तक के बच्चों की निःशुल्क सर्जरी (कॉक्लियर इम्प्लांट) कराने की व्यवस्था की गई है। इसका लाभ उन्हें उठाना चाहिए।

  • कॉक्लियर इंप्लाट सर्जरी के बाद ठीक हो जाती है सुनने-बोलने की परेशानी

आरबीएसके के जिला समन्वयक रंजन कुमार मिश्रा ने बताया कि कॉक्लियर इंप्लाट सर्जरी के बाद बच्चों के सुनने -बोलने की परेशानी ठीक हो जाती है। उन्होंने बताया कि कॉक्लियर इंप्लाट सर्जरी में एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का उपयोग किया जाता है। सर्जरी के दौरान 4-5 घंटे का समय लगता है। उसके बाद बच्चों के स्वास्थ्य जाँच कर उन्हें घर जाने की अनुमति दे दी जाती है। उन्होंने बताया कि आरबीएसके योजना अन्तर्गत बच्चों में होने वाली 43 तरह की बीमारियों का पता लगाने के लिए आंगनबाड़ी केन्द्रों व सरकारी विद्यालयों पर स्क्रीनिंग कैंप लगाकर बच्चों की जाँच की जाती है।

मौके पर एसएन मेहरोत्रा मेमोरियल ईएनटी फाउंडेशन कानपुर की टीम, सीएस डॉ श्रीकांत दुबे, अपर प्रमुख चिकित्सा पदाधिकारी डॉ रमेश चंद्रा, डीसीएम राजेश कुमार, आरबीएसके के जिला समन्वयक रंजन कुमार मिश्रा व अन्य स्वास्थ्यकर्मी मौजूद थे।

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