बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने महिला आरक्षण पर बड़ा बयान दिया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आरक्षण के अंदर ही आरक्षण की वकालत कर दी है। नीतीश कुमार ने केंद्र सरकार से आग्रह करते हुए कहा कि जिस तरह से ओबीसी, एससी और एसटी को आरक्षण दिया जा रहा है, ठीक वैसे ही लोकसभा और विधानसभा में भी आरक्षण तय हो।
महिला आरक्षण बिल का किया स्वागत
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि ये हमारी प्राथमिक मांग है। मेरा आग्रह रहेगा कि आरक्षण कुछ इस तरीके से ही लागू की जाए। महिला आरक्षण बिल का स्वागत करते हुए सीएम ने कहा कि केंद्र सरकार इसे लागू नहीं करना चाहती। इस दौरान सीएम ने बिहार मॉडल की भी चर्चा की।
पंचायत चुनाव में 50 फीसदी आरक्षण
उन्होंने कहा कि हमने 2006 में पंचायत चुनाव में महिलाओं को 50 प्रतिशत का आरक्षण दिया। पंचायत चुनाव के ठीक बाद 2007 में नगर निकाय चुनाव में भी महिलाओं को आरक्षण दिया। बिहार में महिलाओं को मिल रही रिजर्वेशन पर कहा कि राज्य में सभी तरह की नौकरियों में 35 फीसदी का आरक्षण तय किया गया है। पुलिस में भी आरक्षण लागू की गई। महिलाओं को आरक्षण मिलना अच्छी बात है।
ललन सिंह ने केंद्र की मंशा पर उठाए सवाल
एक ओर जहां सीएम नीतीश कुमार ने महिला बिल का स्वागत किया, वहीं उनकी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने लोकसभा में कहा कि ये महिलाओं को छल रहे हैं। इनकी मंशा सही नहीं है। अगर केंद्र की मंशा सही होती तो 2021 में जातीय आधारित जनगणना की शुरूआत हो जाती।
केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि दो करोड़ रोजगार का वादा करके 2014 में देश के बेरोजगारों को छलने का काम किया गया। 2014 में गरीब जनता को भी छला, कहा- काला धन लाएंगे, सबके खाते में 15 से 20 लाख आएंगे, लेकिन मिला क्या। इनलोगों को महिला सशक्तिकरण से कोई मतलब नहीं है। इस सरकार को सिर्फ अपनी कुर्सी से मतलब है। कुर्सी के लिए ये कुछ भी कर सकते हैं।
ललन सिंह ने इशारों-इशारों ने मोहन भागवत पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने आरक्षण पर पुनर्विचार करने की बात कही थी। आरक्षण क्या कोई आपकी कृपा से है, ये संविधान के प्रावधानों के अनुसार है। आज अगर ये बिल आपने लाया है। इसमें अतिपछड़ों को पिछड़ों को आरक्षण दिया जाना चाहिए, उसमें भी महिलाओं को आरक्षण दिया जाना चाहिए।





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