मुजफ्फरपुर जिले के मुशहरी प्रखंड के सुस्ता पंचायत में मिली प्राचीन मूर्ति की पहचान कर ली गई है। उसकी पहचान पालकालीन सूर्य मूर्ति के रूप में हुई है। इससे पहले लोग उसे विष्णु भगवान की मूर्ति समझ रहे थे। मूर्ति की पहचान रामचंद्र शाही संग्रहालय के विशेषज्ञों के साथ, पुरातात्विक विशेषज्ञों ने भी किया है। रामचंद्र शाही संग्रहालय के सहायक संग्रहालयाध्यक्ष डॉ. विमल तिवारी के अनुसार यह मूर्ति दुर्लभ है। साथ ही ऐतिहासिक दृष्टिकोण से भी काफी महत्वपूर्ण है।

मूर्ति की पूजा करते ग्रामीण
मूर्ति को जिले के मिठनपुरा थाना क्षेत्र स्थित रामचंद्र शाही संग्रहालय में ही संरक्षित कर दिया गया है। 21 जून को सुस्ता पंचायत में पोखर की खुदाई के दौरान यह मूर्ति मिली थी। खुदाई के दौरान प्रतिमा का एक हाथ भी टूट गया था। स्थानीय लोगों ने इसे भगवान विष्णु की मूर्ति मानते हुए पूजा पाठ भी शुरू कर दिया था। इस प्रतिमा को मुशहरी बीडीओ चंदन कुमार ने रामचंद्र शाही संग्रहालय में भेज दिया। जहां, संग्रहालय के विशेषज्ञों के अलावा दूसरे पुरातात्विक विशेषज्ञों से पहचान करवाई गई।

राम चंद्र शाही संग्रहालय
रामचंद्र शाही संग्रहालय के सहायक संग्रहालयाध्यक्ष डॉ. विमल तिवारी ने बताया कि यह प्रतिमा नौवीं शताब्दी की प्रतीत होती है। पालवंश का शासन काल आठवीं से 12वीं शताब्दी तक रहा था। प्रतिमा के दोनों हाथों में कमल है। इसके साथ ही प्रतिमा के पैरों में बूट है। इसलिए यह सूर्य की प्रतिमा के रूप में आसानी से पहचान ली गई। यह काले पत्थर की प्रतिमा है। जो भग्न हो चुकी है। अनुमान किया गया कि भग्न मूर्तियों की पूजा निषेध होती है। इसलिए लोगों ने इसे मंदिर से बाहर संरक्षित कर दिया होगा। उन्होंने बताया कि अभी इसपर अध्ययन बाकी है। जहां से यह प्रतिमा मिली है। वहां विशेषज्ञों का दल निरीक्षण करने जाएगी।





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