चंद्रयान 1, 2 और 3 के हिस्सा बने वैज्ञानिक अमिताभ के बुजुर्ग माता-पिता
समस्तीपुर के कुबौलीराम गांव की चर्चा राष्ट्रीय स्तर पर हो रही है। दरअसल भारत के अंतरिक्ष मिशन अभियान चंद्रयान 3 की सफल लॉन्चिंग कराने वाले बिहार के दो होनहारों ने वैज्ञानिको में एक अमिताभ इसी कुबौलीराम गांव के रहने वाले हैं। वहीं दूसरे सीतामढ़ी जिले के पुपरी निवासी रवि कुमार हैं। अमिताभ ने चंद्रयान 3 की लॉन्चिंग में डिप्टी प्रोजेक्ट डायरेक्टर और ऑपरेशन डायरेक्टर की भूमिका निभाई।

अमिताभ की मां बताती हैं कि मां- बाप की सेवा तो सब करते हैं, लेकिन उनका बेटा देश की सेवा कर रहा है। घर परिवार से दूर रहकर भी देश के लिए जी रहा है। इससे ज्यादा खुशी क्या होगी। भगवान ने उसकी तपस्या का फल उसे दिया है। वह मैट्रिक तक घर से पैदल ही स्कूल आया और जाया करता था। किताब ही उसके दोस्त थे।

अमिताभ ने चंद्रयान 3 की लॉन्चिंग में निभाई है डिप्टी प्रोजेक्ट डायरेक्टर की भूमिका
2003 में क्लास वन साइंटिस्ट के रूप में जुड़े थे इसरो से
अमिताभ के गांव के लोग काफी खुश हैं, क्योंकि राष्ट्रीय स्तर पर भी अमिताभ की चर्चा हो रही है। अमिताभ चंद्रयान 1 और 2 का भी हिस्सा रहे हैं। कुबौलीराम गांव में ही अमिताभ ने सरकारी विद्यालय अपनी प्रारंभिक और हाई स्कूल की शिक्षा प्राप्त की। अमिताभ के सेवानिवृत हेडमास्टर पिता राम चंद्र प्रसाद सिंह (87) पत्नी शैल्य देवी (84) के साथ गांव में रहते हैं।
रामचंद्र प्रसाद बताते हैं कि चार बहनों के बाद अभिताभ सबसे छोटा है। उसने Isc से Msc (इलेक्ट्रॉनिक्स) तक की पढ़ाई अमिताभ ने एएन कॉलेज पटना से किया। BIT मेसरा से एमटेक किया। एमटेक के अंतिम वर्ष में उसने प्रोजेक्ट वर्क के लिये इसरो के तीन केंद्रों में आवेदन दिया। 1999 में अमेरिका की रिसर्च कंपनी RMSI से भी जुड़े। 2003 में क्लास वन साइंटिस्ट के रूप में इसरो में इनका सलेक्शन हुआ।

वैज्ञानिक अभिताभ के बुजुर्ग माता पिता
पत्नी जोधपुर एम्स में है कार्यरत
अमिताभ की पत्नी डॉ. ममता सिंह जोधपुर एम्स में कार्यरत हैं। अभिमात को एक बेटा और एक बेटी है। वह गांव बहुत कम ही आ पाते हैं। अमिताभ के पिता बताते हैं कि चंद्रयान 3 की सफल लॉन्चिंग के बाद रात में उनका फोन आया था। वह बहुत खुश थे।



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