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Lockdown2.0 ने बढ़ा दी लीची किसानों की चिंता, प्र’भावित होगा 10 हजार करोड़ का कारोबार…

कोरोना संकट (Coronavirus) को लेकर जारी लॉकडाउन (Lockdown) ने लीची किसानों और व्यापारियों की स’मस्या बढ़ा दी है. लीची (Lychee) की फसल तैयार होने में महज एक माह का ही समय रह गया है लेकिन इसकी पैकैजिंग के लिए बक्से बनाने का काम नहीं शुरू हुआ है. लीची को दूसरे शहरों में भेजने में पैकेजिंग के लिए बड़े पैमाने पर लकड़ी के बक्से का इस्तेमाल होता है लेकिन लॉकडाउन में सारा काम ठ’प्प पड़ा हुआ है. लीची के पैकेजिंग के लिये आमतौर पर लकड़ी के बक्से का प्रयोग होता है. इस बक्से को आरा मशीन में लकड़ी चिराई के बाद कांटी ठोककर बक्सा तैयार किया जाता है.


लीची के लिये मौसम है अनुकूल

इस साल लीची की फसल अनुकूल मौसम के कारण काफी अच्छी है. अगात फलन के तौर पर सबसे पहले अपनी स्वाद और मिठास के लिए प्रसिद्ध शाही लीची तैयार होती है. आम तौर पर 15 से 20 मई के बीच शाही लीची पककर तैयार होता है लेकिन मई के पहले सप्ताह से ही मुजफ्फरपुर के शाही लीची को तोड़ने का काम व्यापारी शुरू कर देते हैं. दक्षिण के राज्यों में खट्टी-मिठ्ठी लीची भी बाजार में व्यापारियों को अच्छी कीमत दे जाती है लेकिन कोरोना संकट के कारण देश भर में लागू लॉक डाउन के कारण इस साल लीची के पैकिंजिंग करने के लिए बक्से बनाने का काम शुरू नहीं हुआ है. आमतौर पर एक माह का समय लाखों बक्से के निर्माण में लगता है लेकिन आरा मशीन बंद होने से बक्सा बनाने का काम शुरू नहीं हुआ है. व्यापारियों को लीची को दूसरे राज्यों में भेजने पर अभी से सं’कट दिखाई पड़ रहा है.
मुजफ्फरपुर में लीची का सबसे अधिक उत्पादन

देश के कुल लीची उत्पादन का 40 फीसदी उत्पादन सिर्फ मुजफ्फरपुर जिले में होता है. देश में 56 हजार हैक्टेयर क्षेत्र में लीची की बागवानी है जिसमें 5 लाख टन लीची का उत्पादन होता है. बिहार में 36 हजार हैक्टेयर क्षेत्र में लीची का उत्पादन होता है जिसमें से 20 हजार हैक्टेयर क्षेत्र में शाही लीची की बागवानी है. बिहार देश का 70 फीसदी लीची उत्पादन करता है जिसमें से अकेले 40 फीसदी लीची मुजफ्फरपुर में होती है. यानि बड़े पैमाने पर लीची की बागवानी नकदी फसल के विकल्प के तौर पर किसान लीची की बागवानी करते हैं. माना जाता है कि 10 हजार करोड़ की इकोनॉमी लीची की बागवानी से जुड़ी हुई है जिसमें से सबसे अधिक फ्रेश लीची का कारोबार दूसरे राज्यों में लीची को भेजकर ही किया जाता है लेकिन कोरोना संकट के कारण हुए लॉक डाउन में लकड़ी के बक्से के निर्माण की अनुमति के साथ ही गाड़ियों के परमिट के बारे में किसान परेशान हो रहे हैं.
प्रगतिशील लीची किसान की मांग
बिहार के किसान श्री से सम्मानित प्रगतिशील लीची किसान भोलानाथ झा ने जिला प्रशासन से शीघ्र बक्सा निर्माण की अनुमति आर मिल पर देने की मांग की है साथ ही लीची का बगीचों के स्प्रे और पटवन के लिये कोरोना बन्दी में छूट देने की मांग की है. 15 मई से राज्य के बाहर लीची भेजने के लिये गाड़ियों की अग्रिम परमिट देने की भी मांग की है.
डीएम ने दिया भरोसा
मुजफ्फरपुर के डीएम चन्द्रशेखर सिंह ने न्यूज से बातचीत में जल्द ही बैठक बुलाने की बात की है. डीएम ने कहा है कि लॉकडाउन के बीच लीची को लेकर एक एक्शन प्लान तैयार कर सभी आवश्यक कदम उठाये जायेंगे. किसानों और व्यापारियों के हितों को ध्यान में रखकर एक्शन प्लान तैयार होगा. लीची किसानों और व्यापारियों में बागों में आई अच्छी फलन के कारण काफी खुशी है लेकिन कोरोना संकट के कारण अंदर से काफी परेशान भी हैं. पिछले कुछ सालों से बच्चों की चमकी बीमारी यानि एईएस को लीची से गलत तरीके से जोड़े जाने के कारण पहले ही लीची किसानों और व्यापारियों को काफी नुकसान उठाना पड़ा है.

Input: News 18

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