40 वर्षों तक सावन के हर साेमवार सिर्फ डाकबम के रूप में पांव-पैदल 14-15 घंटे में पहुंचकर बाबा वैद्यनाथ को जल अर्पित करनेवालीं कृष्णा बम अब कांवरिया पथ पर नहीं दिखेंगी। इस वर्ष से वो पैदल बाबा के जलाभिषेक के लिए नहीं जाएंगी। बाबा के भक्ताें के बीच वह कृष्णा माता बम के नाम से प्रसिद्ध रहीं। सुल्तानगंज-वैद्यनाथ धाम कांवरिया पथ पर उनके आगमन का हर साल दूसरे कांवरियों को भी इंतजार रहता था। वैद्यनाथ धाम के पंडा भी उनका काफी सम्मान करते हैं। उनकी तरफ सबकी निगाहें टिकी रहती थीं।
उनके साथ कदमताल करना दूसरे कांवरिए सौभाग्य मानते थे। उनके निकलते ही हुजूम साथ हो जाने को लेकर प्रशासन की ओर से हर वर्ष पुलिस की ड्यूटी लगाई जाती थी। लेकिन, अब वाे कृष्णा माता बम काेराेना काल काे छाेड़ कर पहली बार झूमते-गाते बाबा नगरी नहीं पहुंचेंगी। दैनिक भास्कर ने जब उनसे इसके बारे में पूछा ताे 72 वर्षीय कृष्णा भावविभाेर हाे गईं। इस समय पुणे में अपने बेटे के साथ हैं। माेबाइल पर बताया कि वृद्धावस्था के चलते अब पैदल नहीं जा पाएंगी, पर जहां रहेंगी बाबा की आराधना करती रहेंगी।

1982 में स्वप्न में आए बाबा वैद्यनाथ तभी से चढ़ाती आ रहीं गंगाजल
कृष्णा बम की भगवान शिव में असीम आस्था है। उनकी शिवभक्ति यात्रा 1976 में बाबा गरीबनाथ काे जलाभिषेक के साथ शुरू हुई थी। कहा- जगत के पालनहार भगवान शिव खुद ताे वैरागी हैं, मगर भक्ताें के लिए सिर्फ कल्याणकारी। परेशानियाें से भरे उनके जीवन में शिवभक्ति ने सारी खुशियां ला दीं। उनकी कृपा से आज उनके पास भरा-पूरा परिवार व जरूरत की सारी सुख-सुविधाएं हैं।
बताया कि 1976 से 1985 तक लगातार सावन के प्रत्येक साेमवार काे वाे पहलेजा घाट से डाक बम के रूप में गंगाजल लाकर बाबा गरीबनाथ काे अर्पित करती रहीं। इस दाैरान उन्हें अटूट विश्वास हाे गया कि शिव ही हर समस्याओं के समाधान हैं। 1982 में स्वप्न में उन्हें बाबा वैद्यनाथ का दर्शन हुआ।
तबसे लगातार 2022 तक सावन के प्रत्येक साेमवार काे वह मुजफ्फरपुर से ट्रेन से सुल्तानगंज जातीं और वहां से गंगाजल लेकर डाक कांवरिया के रूप में पैदल वैद्यनाथ धाम जाकर जलाभिषेक करती रहीं। इस दाैरान उन्हें श्री कृष्णा माता बम का नाम मिला। सावन में सुल्तानगंज से बाबा वैद्यनाथ धाम जानेवाले भक्ताें की संख्या लाखाें में हाेती है।
उन कांवरियाें में जिसे भी कृष्णा माता बम दिख जाती थीं वाे उनके पैर छूने के लिए बेताब हाे जाते थे। कृष्णा माता बम काे सुल्तानगंज से बाबा वैद्यनाथ मंदिर पहुंचने तक सरकार की ओर से विशेष सुरक्षा मुहैया कराई जाती थी। हालांकि, वाे कहती हैं कि वह प्रशासन की अपनी व्यवस्था थी। बाबा की नगरी जानेवालाें काे देश-दुनिया की काेई फिक्र नहीं हाेती, काेई डर नहीं सताता।
प्रमुख धार्मिक यात्रा…
- 1976-1985 तक सावन के हर साेमवार पहलेजाघाट से डाकबम बन कर बाबा गरीबनाथ का जलाभिषेक।
- 1982-2022 सावन के हर साेमवार सुल्तानगंज से डाकबम के रूप में जाकर बाबा वैद्यनाथ का जलाभिषेक।
- 02 बार डाक कांवर के रूप में पहलेजा से अरेराज की 175 किमी दूरी 30 घंटे में तय कर गंगाजल अर्पित कीं।
- 1988 में हरिद्वार से 30 दिनाें में 1500 किमी चलकर वैद्यनाथ धाम गईं, 11 बार माता वैष्णाे देवी की पैदल यात्रा।



Leave a Reply