मुजफ्फरपुर के एलएस कॉलेज में स्तिथ कल्प-वृक्ष में 35 वर्ष बाद फूल खिला है। पुराणाें के अनुसार कल्प वृक्ष का स्वर्ग का एक ऐसा वृक्ष होता है, जिसकी छाया में पहुंचते ही सभी कामनाएं पूर्ण हो जाती हैं। लाक्षणिक अर्थ में ऐसा व्यक्ति जो दूसरों की उदारतापूर्वक सहायता करता हो वह कल्प-वृक्ष माना जाता है। यह दानी वृक्ष है। यह वृक्ष अधिक ऊंचा, घेरदार और दीर्घजीवी होता है।

तत्कालीन डीजीपी डीपी ओझा ने लगाया था कल्पवृक्ष
तत्कालीन डीजीपी डीपी ओझा ने लगाया था पेड़
शास्त्रों-पुराणों में वर्णित दुर्लभ देववृक्ष ही कल्पवृक्ष है। वही कल्पवृक्ष, जिसके बारे में मान्यता है कि इससे जो मांगों वह मिल जाता है। इसे कल्पतरू, कल्पद्रुप, सुरतरु, देवतरु और कल्पलता इत्यादि नामों से भी जाना जाता है। मुजफ्फरपुर के एलएस कॉलेज में दुर्लभ कल्पवृक्ष है। इसी कॉलेज के विद्यार्थी रहे तत्कालीन डीजीपी डीपी ओझा ने कॉलेज परिसर स्थित राजेंद्र पार्क में 35 साल पहले इसे लगाया था। 35 साल के बाद पहली बार इस पेड़ पर दुर्लभ फूल खिला है।

35 साल बाद खिला है फूल
अफ्रीकी महाद्वीप के रेगिस्तानी में पाया जाता है यह पेड़
दशकों में कभी कभार किसी को दिखायी देने वाला यह फूल करीब 35 वर्ष पुराने कल्पवृक्ष में खिला है। वनस्पति विभाग के विभागाध्यक्ष पियूष चंद्र वर्मा ने बताया कि यह वृक्ष काफी पुराना है। इसका वैज्ञानिक नाम ‘बॉबबेब’ है। मूल रूप से यह अफ्रीकी महाद्वीप के रेगिस्तानी क्षेत्र में पाया जाता है। भारत में प्राकृतिक रूप से यह वृक्ष कहीं नहीं पाया जाता है। इस पेड़ में काफी औषधीय गुण होते हैं।



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