उत्तर बिहार का सबसे बड़ा व्यावसायिक केंद्र और सांस्कृतिक राजधानी के रूप में प्रसिद्ध मुजफ्फरपुर शहर चाराें दिशाओ से रेललाइन से घिरा है। करीब 100 ट्रेनें व मालगाड़ियां इन रेलखंडाें से प्रतिदिन गुजरती हैं। इन रेलखंडाें की गुमटियाें पर आरओबी नहीं बनने का खामियाजा लाेगाें काे भुगतना पड़ता है। हाजीपुर रेलखंड पर बीबीगंज, गाेबरसही, खबड़ा, रामदयालुनगर गुमटी, माेतिहारी रेलखंड पर ब्रह्मपुरा व दामाेदरपुर गुमटी, समस्तीपुर रेलखंड पर सदातपुर, शेरपुर आदि गुमटियों पर हर दिन करीब 5 लाख से अधिक लाेग 8 घंटे तक फंसते हैं। आरओबी निर्माण नहीं हाेने से लाेगाें काे काफी परेशानियाें का सामना करना पड़ता है। इन गुमटियाें से हाेकर एंबुलेंस, हार्ट पेशेंट, प्रसूता, एईएस मरीज समेत अन्य गंभीर मरीज भी आते-जाते हैं।
लेकिन, गुमटी बंद हाेने से उन्हें भी रुकना पड़ता है। रेलवे के नियम के अनुसार काेई भी गुमटी अधिकतम 10 मिनट तक ही बंद हाे सकती है। लेकिन ये गुमटियां 30 मिनट तक बंद रहती हैं। खासकर रामदयालुनगर रेलखंड दाेहरीकरण हाेने के कारण अधिकांश समय में अप व डाउन लाइन की एक साथ ट्रेनें आती रहती हैं। जब कभी एक लाइन पर मालगाड़ी व दूसरी लाइन पर यात्री ट्रेनें आती हैं ताे 30 से 40 मिनट तक गुमटी बंद रहती है। चिलचिलाती धूप, बरसात व ठंड में इस रास्ते गुजरने वाले राहगीर अपने घर से ताे आ जाते हैं, लेकिन शहर के मुहाने पर पहुंचकर गुमटी खुलने का इंतजार करना पड़ता है। नतीजा यह है कि कई बार हंगामा व मारपीट तक की नाैबत आ जाती है।
104 नंबर ब्रह्मपुरा गुमटी के समीप
एक सिग्नल लगाने का प्रस्ताव
माेतिहारी रेलखंड के 104 नंबर ब्रह्मपुरा गुमटी से हाेकर माेतिहारी व सीतामढ़ी रेलखंड की ट्रेनें व मालगाड़ियां आती-जाती हैं। इसकाे लेकर यह गुमटी हर दिन करीब 6 घंटे से अधिक समय तक बंद रहती है। लाेगाें की शिकायत पर परिचालन विभाग ने इस गुमटी के समीप एक सिग्नल लगाने का प्रस्ताव दिया है। बताया जाता है कि यदि यहां एक सिग्नल लग जाता है तब ब्लाॅक सेक्शन छाेटा हाे जाएगा। यहां इंजन पहुंचने के बाद ही गुमटी बंद की जाएगी। वहीं, ट्रेन के गुजरते ही गुमटी खुल जाएगी। बताया जाता है कि सिग्नल लग जाने से दामाेदरपुर गुमटी की भी जाम की समस्या कम हाे जाएगी।



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