नेता प्रतीपक्ष तेजस्वी यादव ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि केंद्र से बात कर दूसरे राज्यो में फंसे बिहारी मजदूरों को उनके घर भेजने का कोई रास्ता निकले। उन्होंने मजदूरों से भी अपील की है कि, इस विषम परिस्थिति में उन्हें भी थोड़ा धैर्य से कम लेना चाहिये। उनकी छोटी गलती उनके खूद के साथ समाज की लिए घा’तक हो सकता है।
उन्होंने कहा है कि सरकार को समझना चाहिए कि एक कमरे में 20 मजदूर रह रहे हैं, तो ऐसे भी सोशल डिस्टेंसिग का पालन नहीं हो रहा है। घर लौटने के लिये सड़क पर उतरना सरकार की असंवेदनशीलता को दर्शाता है। जब उतराखंड में फंसे हज़ारों गुजरातियों को डिलक्स बस में विशेष इंतज़ाम करके अहमदाबाद ले ज़ाया जा सकता है तो ग़रीब बिहारियों को 21 दिनों बाद भी साधारण ट्रेन में वापस क्यों नहीं लाया जा सकता? विदेशों से जो लोग आए उनकी स्क्रीनिंग कर उन्हें अपने घर तक पहुंचाया गया, उसी तरह देश के सभी ग़रीब प्रवासी लोगों की स्क्रीनिंग कर उन्हें भी अपने घर भेजा जाए।

तेजस्वी ने कहा कि अगर उन्हें देश भर में खड़ी रेलगाड़ियों में सोशल डिस्टेंसिंग का ख़्याल रखकर वापस घर भेज दिया जाए तो क्या दिक्कत है? अमीर और ग़रीब के लिए अलग-अलग क़ानून नहीं हो सकता? संकट की घड़ी में हम अपने लोगों को ऐसे नहीं छोड़ सकते। यह सरकार की नैतिक ज़िम्मेवारी है।
तेजस्वी ने सवाल करते हुए कहा कि क्या राहत कैम्पों में रहने वाले बाहर से लौटे किसी मजदूर में कोई एक भी पॉज़िटिव केस मिला? तो फिर इन लोगो को क्यों उनके हाल पर छोड़ दिया गया। मुसीबत की घड़ी में हर कोई अपने घर लौटना चाहता है






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