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टीबी मुक्त अभियान में सरकारी के साथ निजी चिकित्सक भी निभाएंगे महत्वपूर्ण भूमिका -डॉ रंजीत राय

टीबी मुक्त अभियान में सरकारी के साथ निजी चिकित्सक भी निभाएंगे महत्वपूर्ण भूमिका -डॉ रंजीत राय

-प्रोग्रामेटिक मैनेजमेंट ऑफ़ टीबी ट्रीटमेंट को लेकर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित

  • 2025 तक टीबी मुक्त जिला बनाने का रखा गया है लक्ष्य
  • निजी क्षेत्र के मरीजों को सरकार के वेब पोर्टल पर सूचिबद्ध करें

मोतिहारी, 05 जून। टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत मोतिहारी के एक सभागार में निजी चिकित्सकों के लिए टीबी से संबंधित विषयों पर कार्यशाला आयोजित की गई। जिसका उद्घाटन जिला संचारी रोग पदाधिकारी डॉ रंजीत राय, आईएमए के जिलाध्यक्ष डॉ आशुतोष शरण, डॉ तबरेज़ अजीज,डॉ डी नाथ एवं डॉ सुशील कुमार सिन्हा के द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। कार्यशाला को संबोधित करते हुए डॉ रंजीत राय ने कहा कि वर्ष 2025 तक टीबी मुक्त भारत बनाने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं आईएमए के जिला अध्यक्ष ने कहा कि अधूरे एवं अनियमित इलाज के कारण टीबी के जीवाणु एक या अधिक दवाओं के प्रति रेजिसटेंट हो रहे और प्रयुक्त दवा बेअसर हो रही जो चिंतनीय विषय है। उन्होंने टीबी उन्मूलन जैसे कार्य में सभी सरकारी व प्राइवेट चिकित्सकों से बढ़-चढ़ कर सहयोग करने की अपील की।

निजी क्षेत्र के मरीजों को सरकार के वेब पाेर्टल पर सूचिबद्ध करें:

कार्यशाला में उपस्थित डब्ल्यूएचओ कंसलटेंट डॉ राजीव ने कार्यक्रम के महत्व पर चर्चा करते हुए कहा कि निजी क्षेत्र के मरीजों को सरकार के वेब पाेर्टल पर सूचिबद्ध कर उन्हें सरकार द्वारा प्राप्त सुविधाओं से जोड़ा जाए। उन्होंने निजी चिकित्सकों से मरीजों को सीबीनैट जांच कराने का अनुरोध करते हुए कहा कि इससे टीबी बीमारी के साथ रिफाम्पिसिन रेजिसटेंस की भी जानकारी मिलती जो मरीजों के इलाज के लिए काफी कारगर है।

मौके पर संचारी रोग पदाधिकारी डॉ रंजीत राय,आईएमए के जिला प्रेसिडेंट डॉ आशुतोष शरण, डॉ तबरेज़ अजीज,डॉ डी नाथ एवं डॉ सुशील कुमार सिन्हा, डॉक्टर फॉर यू के प्रोजेक्ट मैनेजर युवराज सिंह, कोऑर्डिनेटर विकास सिंह, ज़िला समन्वयक कावेंद्र कुमार सागर, आदित्य के साथ जिला यक्ष्मा केंद्र की पूरी टीम मौजूद थी।

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