कर्मनाशा नदी पुल के क्ष’तिग्र’स्त होने के कारण की जांच के लिए मंगलवार को दिल्ली से जांच टीम पहुंची। दो सदस्यीय जांच टीम ने लगभग चार घंटे तक पुल पर पड़’ताल की। लिफ्ट लगाकर क्ष’तिग्र’स्त तीनों पीलर व विंग को देखा। साथ ही कई फोटो भी क्लिक किये। जांच टीम ने फिलहाल कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया। अधिकारियों का कहना है कि जांच टीम की रिपोर्ट के आधार पर अगली का’र्यवाही होगी।यूपी-बिहार को जोड़ने वाला कर्मनाशा पुल शनिवार की सुबह क्ष’तिग्र’स्त हो गया था। पुल के तीन पीलर व विंग क्षति’ग्रस्त हो गए थे। इसके बाद पुल से वाहनों के आवागमन पर रोक लगा दी गई। नेशनल हाइवे नंबर दो पर पुल डैमेज होने व यातायात व्यवस्था ठप होने से यूपी, बिहार, पश्चिम बंगाल व दिल्ली तक के व्यापारियों की प’रेशानी बढ़ गई है।


एनएचएआई दिल्ली हेड क्वाटर से जांच अधिकारी राजीव अहूजा व आलोक भौमिक मंगलवार की दोपहर लगभग ढ़ाई बजे जांच के लिए पहुंचे।दोनों जांच अधिकारी बारी-बारी से लिफ्ट के सहारे क्षतिग्रस्त पीलरों व विंग की सूक्ष्मता से जांच करते रहे। अपने मोबाइल से फोटो भी खींचे। इसके बाद पुल मार्ग व रेंलिग के उस स्थान को भी देखा, जहां दरार आ गई है। जांच अधिकारियों ने बताया कि पुल के क्षतिग्रस्त होने में पीयर कैप (बेयरिंग) की समस्या, ओवरलोड, मेटेरियल गुणवत्ता, तकनीकी समस्या समेत कई कारण हो सकते हैं। पुल की मियाद लगभग सौ वर्ष होती है। इस पर सौ टन वजन के ट्रक आवागमन कर सकते हैं। पुल निर्माण में लगभग 129 करोड़ 60 लाख रुपये की लगी थी।जांच अधिकारियों ने फिलहाल पुल के भविष्य के बारे में अभी कुछ भी बताने से इनकार कर दिया। इस मौके पर एनएचएआई के रीजनल मैनेजर एके मिश्र, पीडी योगेश गढ़वाल, एसडीएम सदर हीरालाल, नायब तहसीलदार रवि रंजन कश्यप समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

बिना नमूना लिये रवाना हो गई टीम
कर्मनाशा नदी के पुल का निरीक्षण करने आए अधिकारियों ने लिफ्ट वाहन से सूक्ष्मता से जांच पड़ताल तो की लेकिन मैटेरियल का नमूना नहीं लिया। वहीं लिफ्ट पर चढ़ते समय सेप्टी कैप लगाने की जरुरत भी नहीं समझी। जांच की प्रक्रिया देख लोगों ने निष्पक्ष जांच पर सवाल भी खड़े किए। उधर, एनएचएआई के पीडी योगेश गढ़वाल ने बताया कि जांच टीम ने अभी पुल की डिजाइन व ओवरलोड पर फोकस किया है। वहीं, क्ष’तिग्रस्त कर्मनाशा पुल के सामांतर दोनों तरफ वैकल्पिक मार्ग का निर्माण मंगलवार को भी युद्ध स्तर पर जारी रहा। पुल के उत्तर तरफ नदी के पानी की निकासी के लिए सीमेंट की पाइप के लिए गिट्टी डालने का कार्य शुरू हो गया। पाइप की मजबूती के लिए कंक्रीट का ब्लॉक भी बनाया जा रहा है। दोनों तरफ बिछाने के लिए जहां एक तरफ पाइप स्टोर किया जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ दर्जनों डंफर से गिट्टी डंफ की गई है। वैकल्पिक मार्ग का निर्माण कार्य चौबीस घंटे जारी है। इसके लिए चारों तरफ लाइट की व्यवस्था की गई है। निर्माण के दौ’रान छोटा हा’दसा भी हो गया। पोकलेन मशीन की च’पेट में आने से 24 वर्षीय मजदूर विशाल घा’यल हो गया। उसे तत्काल इ’लाज के लिए एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया। पोकलेन मशीन से दोपहर लगभग 12 बजे कंक्रीट ब्लॉक बिछाया जा रहा था। विशाल दूसरी मशीन में बंधा कंक्रीट ब्लॉक खोल रहा था। पोकलेन मशीन के बोकेट से उसके पीठ में गं’भीर चो’ट आ गई।

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