यदि समय रहते जरूरी कदम नहीं उठाए गए तो कोझिकोड जैसे विमान हा’दसे पटना और जम्मू जैसे एयरपोर्ट पर भी हो सकते हैं। एयर सेफ्टी एक्सपर्ट कैप्टन मोहन रंगनाथन ने हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में शनिवार को ये बातें कहीं। रंगनाथन सिविल एविएशन मिनिस्ट्री की ओर से गठित सेफ्टी अडवाइजरी कमिटी के भी सदस्य हैं। उन्होंने 9 साल पहले ही चेतावनी दी थी कि कालीकट (अब कोझिकोड) एयरपोर्ट लैंडिंग के लिए सुरक्षित नहीं है।
रंगनाथन ने कहा, ”चे’तावनी को नजरअंदाज कर दिया गया। मेरे विचार से यह दुर्घ”टना नहीं, ह’त्या है। उनके अपने ऑडिट ने भी सुरक्षा मुद्दों को उठाया था।” उन्होंने यह भी कहा कि इस हा”दसे को रोका जा सकता था। रंगनाथन ने बताया कि कैसे ‘टेबल टॉप रनवे’ में जगह की कमी होती है और इसलिए अधिक सुरक्षात्मक उपायों की आवश्यकता होती है।
उन्होंने कहा, ”कोझिकोड में रनवे के बाद 70 मीटर गहरी खाई है, मैंगलोर में तो गहराई 70 मीटर है। यदि कोई विमान रनवे से आगे निकल जाए तो बचने की कोई संभावना नहीं होती।” एक बार फिर चेताते हुए रंगनाथन ने कहा, ”अगला बड़ा हादसा पटना या जम्मू एयरपोर्ट पर हो सकता है। दोनों ही खत’रनाक एयरपोर्ट हैं और इनके सुरक्षा के उपाय नहीं हैं।”

करीब एक दशक पहले सिविल एविएशन सेक्रेटरी रंगनाथन ने सिविल एविएशन सेफ्टी अडवाइजरी काउंसिल (CASAC) के चेयरमैन को लेटर लिखकर कहा था कि कोझिकोड का रनवे 10 बारिश के दौरान लैंडिंग के लिए जोखिम भरा हो सकता है। उन्होंने कहा था, ”मैं समझता हूं कि रनवे 10 ILS कालीकट एयरपोर्ट पर ट्रायल के आधार पर यूज किया जा रहा है। कुछ क्रू यहां VOR अप्रोच भी स्वीकार कर रहे हैं। कारण यह है कि रनवे 28 के मुकाबले यह छोटा है। हालांकि, बारिश में जो भी विमान यहां टेलविंड कंडीशन में उतर रहे हैं वे सभी यात्रियों की जान खतरे में डाल रहे हैं।” उन्होंने यह भी कहा था कि एयरपोर्ट के पास मिनिमम रनवे और सेफ्टी एरिया नहीं है।

Input: Hindustan



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