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देश के एकमात्र सांसद..जो पायलट सीट पर यात्रा करते हैं:33000 फीट की ऊंचाई पर कहा-हम पटना की तरफ बढ़ रहे हैं

नमस्कार ! मैं फ्लाइट कैप्टन राजीव प्रताप रूडी आपका स्वागत करता हूं। इस समय आप 33 हजार फीट की ऊंचाई पर हैं। हम दिल्ली से चलकर गंडक और गंगा पार करते हुए पटना की तरफ आगे बढ़ रहे हैं। आसमान पूरी तरह से साफ है, आप धरती का मनमोहक नजारा देख सकते हैं

हवाई यात्रा के दौरान कभी-कभी सुनाई देने वाली यह आवाज सामान्य पायलट की नहीं, बल्कि पूर्व केंद्रीय मंत्री और सारण के भाजपा सांसद राजीव प्रताप रूडी की है।

दिल्ली-पटना की फ्लाइट के पैसेंजर्स ने शुक्रवार को पायलट का नाम सुना तो वे भी चौंक गए। कैप्टन की सीट पर राजीव प्रताप रूडी बैठे हुए थे। रूडी देश के पहले सांसद हैं, जिनके पास कमर्शियल पायलट और 320 एयरबस उड़ाने का लाइसेंस है। पढ़िए रूडी किस वजह से उड़ाते हैं कमर्शियल फ्लाइट और यहां तक के उनके सफर की कहानी…।

राजीव प्रताप रूडी कॉलेज के समय से ही राजनीति में रूचि रखते थे। उन्होंने राजनीति की पहली सीढ़ी चंडीगढ़ के गवर्नमेंट कॉलेज में अध्यक्ष पद जीतकर चढ़ी। यहां से बिहार लौटे और पटना के एएन कॉलेज में लेक्चरर बन गए। वह 1990 में 26 साल की उम्र में विधायक बने। रूडी उस समय सबसे कम उम्र के विधायक थे।

वह 1996 में भाजपा के टिकट पर लोकसभा का चुनाव जीत गए। अटल सरकार में वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री बने। बाद में उन्हें नागरिक उड्‌डयन मंत्री भी बना दिया गया था। रूडी ने विदेश में पायलट की ट्रेनिंग ली है।

लोकसभा की तरह फ्लाइट का लाइसेंस भी रिन्यू

सांसद राजीव प्रताप रूडी ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा- फ्लाइट उड़ाना उनका पैशन है। वह किसी भी एयरलाइंस कंपनी के एम्पलाई नहीं हैं, लेकिन यात्रा सामान्य सीट पर करने के बजाय पायलट सीट से करते हैं। वह देश के इकलौते ऐसे सांसद हैं, जिसके पास 320 एयरबस उड़ाने का लाइसेंस है। जिस तरह 5 साल में जनता के बीच जाकर लोकसभा का लाइसेंस रिन्यू करना होता है, ऐसे ही विमान उड़ाकर DGCA का लाइसेंस को जिंदा रखना पड़ता है।

राजीव प्रताप रूडी अक्सर इस तरह से अनाउंसमेंट कर लोगों को चौंका देते हैं।

राजीव प्रताप रूडी अक्सर इस तरह से अनाउंसमेंट कर लोगों को चौंका देते हैं।

जानिए एयरलाइंस कंपनी कैसे करती है मैनेज

जिस फ्लाइट में रूडी यात्रा करते हैं, उसकी कप्तानी खुद करते हैं। इसके लिए एयरलाइंस कंपनी को भी पायलट मैनेजमेंट करना पड़ता है। सांसद का कहना है कि एयरलाइंस कंपनी के साथ उनका अवैतनिक एग्रीमेंट है। इसके साथ ही DGCA के जो मानक और मापदंड है, उसका पालन करना होता है। इतने बड़े विमान के कमर्शियल कप्तान होने की वजह से दायित्व भी बहुत बड़ा होता है। फ्लाइट को उड़ाते वक्त पैसेंजर की जिम्मेदारी लेकर चलना आसान नहीं होता है। राजनीति से स्विच करके विमान कक्ष में कप्तान बन जाना, मेरे लिए एक प्रकार से योग और ध्यान है। कम से कम हर उड़ान में डेढ़ घंटे तक दूसरी दुनिया में होता हूं। जब मैं उड़ान पर होता हूं तो कंपनी को एक पायलट भेजना पड़ता है।

रूडी ने कहा- मैं जब अपनी यात्रा पूरी कर फ्लाइट छोड़ता हूं, तो रिजर्व पायलट विमान लेकर उड़ता है। यात्रा करनी होती है तो पहले से एयरलाइंस कंपनी को बताना होता है। कंपनी ऑफिशियल व्यवस्था से पायलट अलॉट करती है, लेकिन यात्रा के दौरान मेन पायलट मैं ही होता हूं।

सांसद को पायलट सीट पर देख चौंक जाते हैं लोग

राजीव प्रताप रूडी को विमान की पायलट सीट पर देखकर नेता से लेकर अफसर तक चौंक जाते हैं। हाल ही में वह दिल्ली से फ्लाइट लेकर पटना आ रहे थे। विमान में उनके ही संसदीय क्षेत्र सारण के डीएम राजेश मीणा भी सवार थे। जब सांसद राजीव प्रताप रूडी यात्रियों को संबोधित करने आए तो डीएम चौंक गए। राजीव प्रताप रूडी का कहना है कि बिरले ऐसा हुआ होगा, जब जिले के कलेक्टर को उसका सांसद उड़ाकर ले जाए।

पहले तो उन्हें विश्वास ही नहीं हुआ, लेकिन संयोग था कि हमारा आमना-सामना विमान में ही हुआ। अक्सर कोई मानने को तैयार नहीं होता है कि मैं विमान उड़ाता हूं। डीएमके सांसद दयानिधि मारन के साथ भी ऐसा ही हुआ था।

एक संसदीय समिति की बैठक में हिस्सा लेने के बाद वह जिस फ्लाइट से चेन्नई गए, उसके पायलट BJP सांसद रूडी ही थे। दयानिधि मारन रूडी को पायलट के रूप में देखकर हैरान रह गए।

नेताओं की छवि को खतरनाक मानते हैं रूडी

सांसद राजीव प्रताप रूडी बताते हैं कि लोग नेताओं की छवि को काफी खतरनाक मानते हैं। नेता कुछ और भी करने लायक होगा, इस पर लोगों की निगेटिव राय होती है। यही कारण है कि लोग बार बार आकर पूछते हैं कि आप सच में विमान उड़ाते हैं।

कई बार तो विमान में लोग यह बोलते हैं कि आपका चेहरा ताे भाजपा के नेता की तरह दिखता है। सांसद का कहना है कि वह 10 साल से विमान उड़ा रहे हैं, लेकिन इसका प्रचार नहीं करते हैं। यात्रा के दौरान सरकार का खर्च भी बचता है। पार्लियामेंट के खर्च से आने-जाने में पायलट की सीट संभालने से किराए के रूप में सरकार का पैसा नहीं खर्च होता है।

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