पश्चिम चंपारण (बेतिया) : दुष्यंत कुमार की एक मशहूर पंक्ति है, ‘कौन कहता है आसमां में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों.’ इस पंक्ति को अंशु कुमारी ने सच साबित कर दिखाया है.
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बिहार टॉपर अंशु की कहानी : अंशु कुमारी बिहार बोर्ड की मैट्रिक परीक्षा में टॉप की है. जब आप उसके संघर्ष की कहानी जानेंगे तो उसे सैल्यूट करेंगे. जी हां एक मामूली किसान और मजदूर की बेटी ने ना सिर्फ अपने मां-बाप का नाम रोशन किया है. बल्कि पूरा गांव आज उसकी सफलता से झूम रहा है.

डॉक्टर बनने का है सपना : अंशु कुमारी ने 500 में से 489 अंक यानी 97.80 प्रतिशत नंबर लाकर शीर्ष का स्थान प्राप्त की है. अंशु कुमारी आगे चलकर नीट की तैयारी करना चाहती है और डॉक्टर बनने का सपना है. अंशु कहती है कि समाज के लिए मैं कुछ करना चाहती हूं.

बड़ी बहन ने की काफी मदद : अंशु कुमारी पश्चिमी चंपारण जिले के नौतन प्रखंड के गहिरी पंचायत में रहती है. अंशु कुमारी भारतीय इंटर महाविद्यालय गहिरी की छात्रा है. उसने अपनी सफलता का श्रेय मुख्य रूप से अपनी बड़ी बहन पूजा कुमारी को दिया है, जो प्राइवेट शिक्षक हैं. अंशु ने गांव में ही कोचिंग की और इस मुकाम पर पहुंची.

अंशु को 2 बहन और एक भाई : अंशु के पिता का नाम भूपेन्द्र शाह है, जबकि उसकी मां का नाम सबीता देवी है. अंशु चार भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर है. उससे छोटा एक भाई और एक बहन है. छोटी बहन भी अंशु की तरह घर का नाम रोशन करना चाहती है.

पिता करते हैं मजदूरी : अंशु के पिता भूपेन्द्र शाह किसी तरह अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं. चूंकि उनके पास जमीन नहीं है इसलिए बटाई पर खेत करते हैं. यहीं नहीं दूसरे के यहां पर मजदूरी भी करते हैं. मतलब एक मजदूर की बेटी बिहार की टॉपर बनी है.




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