नालंदा : भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा के प्रतीक नालंदा विश्वविद्यालय में आज द्वितीय दीक्षांत समारोह का भव्य आयोजन होने जा रहा है. इस ऐतिहासिक अवसर पर भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी. राष्ट्रपति के तौर पर राजगीर स्थित विश्वविद्यालय का यह उनका पहला दौरा होगा. इससे पहले वर्ष 2016 में पहला दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया था.

सभागार ‘विश्वमित्रालय’ का उद्घाटन होगा
समारोह के दौरान राष्ट्रपति विश्वविद्यालय के नवनिर्मित अत्याधुनिक 2000 सीटों वाले सभागार ‘विश्वमित्रालय’ का उद्घाटन करेंगी, जो आने वाले समय में वैश्विक शैक्षणिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बनेगा. इसके साथ ही छात्रों द्वारा तैयार की गई विशेष पत्रिका ‘मंजिरी’ का भी विमोचन किया जाएगा, जिसमें विभिन्न सत्रों की उपलब्धियां और अनुभव संकलित हैं.

समारोह में अंतरराष्ट्रीय भागीदारी की भी खास झलक
इस दीक्षांत समारोह में अंतरराष्ट्रीय भागीदारी की भी खास झलक देखने को मिलेगी. अर्जेंटीना, वियतनाम, भूटान, इंडोनेशिया, केन्या, लाओस, म्यांमार, घाना, सर्बिया, थाईलैंड, नेपाल, बांग्लादेश और जिम्बाब्वे सहित 13 देशों के छात्रों को डिग्रियां प्रदान की जाएंगी. राष्ट्रपति द्वारा 10 पीएचडी शोधार्थियों और 36 मेधावी छात्र-छात्राओं को स्वर्ण पदक भी दिए जाएंगे.

दक्षिण-पूर्व एशियाई अध्ययन केंद्र का होग शुभारंभ
इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 22वें आसियान-भारत शिखर सम्मेलन में घोषित दक्षिण-पूर्व एशियाई अध्ययन केंद्र का औपचारिक शुभारंभ भी किया जाएगा. यह केंद्र भारत की ‘Act East Policy’ को शैक्षणिक स्तर पर मजबूती प्रदान करेगा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देगा.

परंपरागत परिधानों में भी बदलाव
दीक्षांत समारोह में इस बार परंपरागत परिधानों में भी बदलाव किया गया है. भारी औपनिवेशिक गाउन की जगह छात्रों के लिए खादी के वस्त्र अपनाए गए हैं, जबकि विशिष्ट अतिथियों के लिए अहिंसा रेशम (पीस सिल्क) से बने परिधान तैयार किए गए हैं, जिसमें बिहार का प्रसिद्ध भागलपुरी रेशम भी शामिल है. यह पहल पर्यावरण संरक्षण और भारतीय परंपरा को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

समारोह में अतिथियों को मिलेंगे विशेष वस्त्र
इसके साथ ही समारोह में अतिथियों को दिए जाने वाले अंगवस्त्र बिहार के नपुरा और बसवन बिगहा के बुनकरों से विशेष रूप से तैयार कराए गए हैं. ‘बावन बूटी’ जैसी पारंपरिक बुनाई कला को भी प्रमुखता दी गई है, जो राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती है. नालंदा विश्वविद्यालय का यह दीक्षांत समारोह न केवल शैक्षणिक उपलब्धियों का उत्सव है, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा, सतत विकास और वैश्विक सहभागिता के मूल्यों को भी सशक्त रूप से प्रस्तुत करता है.



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