MUZAFFARPUR

भाई दूज पर सिर्फ 2 घंटे 15 मिनट का है शुभ मुहूर्त, नोट कर लें सही समय

पटना: दीपावली के तीसरे दिन कार्तिक शुक्ल द्वितीय को भाई दूज का त्योहार मनाजा जाता है. भाई-बहन के स्नेह और आशीर्वाद का पर्व भाई दूज इस वर्ष 23 अक्टूबर को मनाया जाएगा. यह पर्व भाई और बहन के बीच प्रेम, विश्वास और सुरक्षा के पवित्र बंधन का प्रतीक है. इस दिन बहनें अपनी भाई को तिलक करती है उनकी लंबी उम्र की कामना करती हैं.

भाई दूज… भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक 

इस वर्ष भाई दूज का शुभ मुहूर्त बहुत सीमित रहेगा. पूजा का श्रेष्ठ समय केवल 2 घंटे 15 मिनट का ही है, जिसमें भाई अपनी बहन के घर जाकर तिलक करवाता है और बहन के हाथ का भोजन करता है. कथाओ के अनुसार इससे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता है.

भाई दूज का शुभ मुहूर्त : पंडित प्रेम सागर पांडे ने बताया कि इस वर्ष भाई दूज की तिथि 22 अक्टूबर की रात 08:16 मिनट से शुरू होकर 23 अक्टूबर की रात 10:46 मिनट तक रहेगी. हालांकि तिलक का शुभ मुहूर्त दोपहर 1:13 से 3:28 तक है. हालांकि इस दिन भाई को तिलक करने के कई शुभ मुहूर्त हैं, लेकिन सबसे शुभ दोपहर 1:13 से 3:28 तक का ही है.

तिलक करने का शुभ मुहूर्त

 

पहला मुहूर्त (अभिजीत मुहूर्त)- सुबह 11:43 से दोपहर 12:28 तक.

दूसरा मुहूर्त (श्रेष्ठ मुहूर्त)- दोपहर 1:13 से दोपहर 3:28 बजे तक.

तीसरा मुहूर्त (विजय मुहूर्त)- दोपहर 1:58 से दोपहर 2:43 बजे तक.

चौथा मुहूर्त (गोधूली मुहूर्त)- शाम 5:43 से शाम 6:09 बजे तक.

इस दौरान तिलक और पूजन करना सबसे फलदायक माना गया है. उन्होंने कहा कि इस अवधि के बाहर तिलक या भोजन संस्कार करने से परंपरागत लाभ नहीं मिलता, इसलिए पूजा उसी समयावधि में करनी चाहिए.

भाई दूज का धार्मिक महत्व

हिंदू मान्यताओं के अनुसार, भाई दूज के दिन यमराज अपनी बहन यमुना के घर पधारे थे. बहन ने विधिवत पूजा कर उन्हें भोजन कराया और तिलक लगाया. यमराज ने प्रसन्न होकर आशीर्वाद दिया कि इस दिन जो भी बहन अपने भाई को तिलक लगाएगी, उसके भाई को दीर्घायु और समृद्धि का वरदान मिलेगा.

इस पर्व को यम द्वितीया भी कहा जाता है 

उन्होंने बताया कि, तभी से यह पर्व यमद्वितीया के नाम से प्रसिद्ध हुआ. पंडित प्रेम सागर पांडे बताते हैं कि भाई दूज रक्षाबंधन की तरह ही एक पवित्र वचन का पर्व है, जो भाई बहन के बीच रक्षा, स्नेह और आदर की भावना को और मजबूत करता है.

भाई दूज की पूजन विधि

बहनें भाई के आगमन से पहले पूजा थाल तैयार करती हैं. इसमें अक्षत, चंदन, रोली, दीपक, फूल और मिठाई रखी जाती है. भाई को पूर्व दिशा की ओर बिठाकर तिलक लगाना और आरती उतारना शुभ माना जाता है. इसके बाद मिठाई खिलाकर बहन भाई की लंबी आयु की कामना करती है. भाई बहन को वस्त्र, उपहार या धन देकर आशीर्वाद देता है.

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