MUZAFFARPUR

अमित शाह ने खुद संभाला मोर्चा, BJP की सीटवार तैयारी को लेकर नहीं हैं खुश

बिहार : बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्य में गहरी दिलचस्पी दिखाई है। पार्टी की तैयारी को खुद मॉनिटर करने के लिए अमित शाह ने प्रदेश भाजपा के तमाम वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों के साथ लगातार बैठकें की हैं। सूत्रों के अनुसार, इन बैठकों में अमित शाह ने पार्टी के प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र की सीटवार स्थिति की समीक्षा की और वहां के माहौल, पार्टी की तैयारी और गठबंधन के कामकाज के बारे में विस्तृत जानकारी हासिल की।

हालांकि, अमित शाह को जो रिपोर्टें और जवाब मिले, उनसे वे पूरी तरह संतुष्ट नहीं दिखे। बैठक में उन्होंने स्पष्ट कहा कि अब तक जो जानकारी उन्हें मिली है, उससे काम नहीं चलेगा और पार्टी को सक्रिय रूप से चुनावी मैदान में उतरना होगा। उन्होंने प्रदेश भाजपा नेतृत्व को निर्देश दिए कि वे तुरंत कार्यकर्ताओं को सक्रिय करें और बूथ स्तर पर चुनावी तैयारियों को मजबूती से लागू करें। इस दौरान उन्होंने बिहार भाजपा के कई सीनियर लीडर को फटकार भी लगाई और कहा की आपलोग पहले तो गुटबाजी करना बंद करें इससे कार्यकर्ता के अंदर भी असंतोष पैदा होता है।आपलोग सिर्फ जनता की नज़रों में साथ नहीं बल्कि सही मायने में साथ रहिए। यदि अगली बार मुझे गुटबाजी की शिकायत मिली तो आप जानते हैं की मुझे कैसे काम करना है तो आपलोग आज से ही इसपर लग जाइए।

अमित शाह ने प्रदेश मुख्यालय में प्रदेश पदाधिकारियों और चुनाव समिति के सदस्यों के साथ अलग-अलग मुलाकातें कीं। इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य विधानसभा चुनाव की सीटवार तैयारियों की समीक्षा करना था। अमित शाह ने विशेष रूप से टिकट बंटवारे और सीट शेयरिंग के बाद उभरे असंतोष पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं के बीच किसी प्रकार की अनबन चुनावी अभियान को कमजोर कर सकती है, इसलिए इस असंतोष को तुरंत दूर करना आवश्यक है।

उन्होंने स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे सक्रिय रहें और गठबंधन के साथ समन्वय बनाए रखें।

अमित शाह की यह रणनीति यह दर्शाती है कि भाजपा राज्य में अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखने और चुनावी सफलता सुनिश्चित करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती।

बिहार में चुनावी तैयारियों के इस दौर में अमित शाह की भूमिका पार्टी के लिए निर्णायक साबित हो सकती है। कार्यकर्ताओं की सक्रियता और गठबंधन के साथ तालमेल ही इस बार भाजपा की जीत की कुंजी हो सकती है।

 

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