MUZAFFARPUR

महागठबंधन में टिकट बंटवारे पर घमासान: वैशाली RJD में ‘बाहरी’ उम्मीदवार को लेकर भारी नाराज़गी

बिहार: बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद भी, वैशाली जिले में महागठबंधन के भीतर टिकट बंटवारे को लेकर भारी असंतोष और गुटबाजी सामने आई है। जिस जिले का प्रतिनिधित्व स्वयं तेजस्वी यादव करते हैं, उसी जिले की राष्ट्रीय जनता दल (RJD) इकाई में ‘बाहरी उम्मीदवारों’ को टिकट दिए जाने की आशंका को लेकर तीव्र नाराज़गी है।

RJD जिलाध्यक्ष की अगुवाई में बड़ी बैठक, ‘मटन-चावल’ भोज का आयोजन

वैशाली RJD के जिलाध्यक्ष ने जिले की पूरी कमेटी के साथ हाजीपुर के चौरसिया चौक स्थित पूर्व एमएलसी सुबोध कुमार राय के आवास पर एक बड़ी बैठक बुलाई। इस बैठक में जिले के सभी पदाधिकारी और बड़े नेता शामिल हुए। इस दौरान, संगठन में एकजुटता बनाए रखने और वर्षों से संघर्षरत स्थानीय कार्यकर्ताओं के पक्ष में माहौल बनाने के लिए मटन-चावल भोज का भी आयोजन किया गया।

खास बात यह है कि यह आयोजन कार्तिक के पावन महीने में हुआ है, और आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद इतनी बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं की बैठक और भोज पर सवाल भी उठ सकते हैं।

स्थानीय vs बाहरी उम्मीदवार पर घमासान

RJD जिलाध्यक्ष ने प्रदेश इकाई को सीधा संदेश देते हुए कहा कि पार्टी को केवल उन संघर्षशील कार्यकर्ताओं को ही उम्मीदवार बनाना चाहिए जो बरसों से क्षेत्र में काम कर रहे हैं। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि कुछ लोग दूसरे जिलों के बड़े उम्मीदवारों को क्षेत्र में घुमा रहे हैं और उन्हें टिकट दिलाने की पैरवी कर रहे हैं। जिलाध्यक्ष ने प्रदेश इकाई से इस पर ध्यान देने और ऐसे ‘बाहरी’ उम्मीदवारों को टिकट न देने की मांग की।

वैशाली की 8 सीटों पर स्थानीय दावेदारी

वैशाली जिले के 8 विधानसभा क्षेत्रों में महागठबंधन के स्थानीय और संघर्षशील कार्यकर्ताओं को ही टिकट दिए जाने की मांग राजद की जिला इकाई कर रही है। हालांकि, जिलाध्यक्ष ने अंत में यह भी स्पष्ट किया कि “पार्टी और गठबंधन द्वारा उम्मीदवार तय किया जाएगा, हम लोग मजबूती से जीतने का काम करेंगे।” लेकिन इस चेतावनी भरे स्वर के साथ ही यह भी साफ हो गया कि यदि बाहरी उम्मीदवार को टिकट दिया गया तो वैशाली RJD में बड़ी बगावत हो सकती है।

कार्यकर्ताओं के लिए आयोजित यह मटन-चावल भोज राजनीतिक एकजुटता दिखाने और प्रदेश नेतृत्व पर स्थानीय उम्मीदवारों को टिकट देने का दबाव बनाने की एक बड़ी कवायद के रूप में देखा जा रहा है।

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