भारत में आकर ठहरने वाले नेपाली और भूटानी नागरिकों की संस्था या मकान मालिक को 24 घंटे के अंदर पुलिस विभाग को उनकी सूचना देनी होगी। ऐसा न करने पर उन पर 50 हजार से तीन लाख रुपये तक का जुर्माना लग सकता है। एक सितम्बर से इस व्यवस्था को अनिवार्य रूप से लागू किया गया है, हालांकि अभी तक इसकी सूचना नहीं दी जा रही है। हाल यह है कि पिछले 25 दिन में किसी भी संस्था, होटल या मकान मालिक की तरफ से नेपाली नागरिक के रुकने की सूचना नहीं दी गई है।

दरअसल, भारत में आने वाले विदेशी नागरिक जहां रुकते हैं वहां मालिक, संचालक आदि को फार्म सी भर कर उपलब्ध कराना होता है। पड़ोसी देश नेपाल के नागरिक इससे बचे हुए थे। एक सितम्बर से यह व्यवस्था उनके लिए भी अनिवार्य रूप से लागू कर दी गई है। नेपाली नागरिकों को भारत में आने के लिए पासपोर्ट की जरूरत नहीं है। लेकिन अब उनके फ्रूट प्रिंट चेक किए जा रहे हैं। मतलब वह कहां जा रहे हैं किसके यहां ठहर रहे हैं क्या कर रहे हैं।

रिकार्ड में 1000 से ज्यादा विदेशी आए
रिकार्ड के मुताबिक गोरखपुर में 25 सितम्बर तक 1000 से ज्यादा विदेशी आए। इसमें नेपाली की संख्या शामिल नहीं है। यह इसलिए क्योंकि इनके बारे में कहीं से सूचना नहीं दी जाती है। अब जब अनिवार्य रूप से सूचना देना होगा तो फिर इनकी संख्या भी इसमें शामिल हो जाएगी।

बड़ी संख्या में गोरखपुर आते हैं नेपाल के लोग
रोजगार, इलाज, पढ़ाई आदि के लिए नेपाल से अच्छी संख्या में लोग गोरखपुर और आसपास के इलाके में आते हैं। वह जहां ठहरते हैं वहां के संचालक को उनके बारे में बताना होगा। अगर किसी के घर में रुकते हैं तो मकान मालिक को सूचना देनी होगी। वहीं अस्पताल में इलाज कराने आते हैं तो अस्पताल संचालक को सूचना देनी होगी। इसी तरह से पढ़ाई करने वाले छात्र की सूचना जिस विश्वविद्यालय/ कालेज में पढ़ते हैं, वहां का प्रशासन सूचना देगा।



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