पटना: बिहार में बुधवार (17 सितंबर) से जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर चले गए हैं. राज्य के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में जूनियर डॉक्टरों ने OPD (आउट पेशेंट डिपार्टमेंट) सहित नॉन-इमरजेंसी सेवाएं ठप कर दी हैं. हालांकि, आपातकालीन सेवाओं को इससे बाहर रखा गया है.
बिहार में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल
जूनियर डॉक्टरों ने यह कदम अपनी लंबित मांगों को लेकर उठाया है. उनका कहना है कि सरकार ने बार-बार आश्वासन दिया, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया. पीएमसीएच सहित पटना मेडिकल कॉलेज, डीएमसीए दरभंगा, नालंदा मेडिकल कॉलेज और अन्य सरकारी संस्थानों में ओपीडी और ओटी सेवाएं पूरी तरह से ठप कर दी गई हैं.

जूनियर डॉक्टरों की मुख्य मांगें
बॉन्ड पोस्टिंग की अवधि को सिर्फ 1 वर्ष किया जाए. बॉन्ड पोस्टिंग को सीनियर रेजीडेंसी के रूप में मान्यता मिले. वेतन और भत्ते में बढ़ोतरी की जाए. पोस्टिंग शुरू होने और परिणाम घोषित होने के बीच की अवधि को बॉन्ड अवधि में शामिल किया जाए. इस्तीफा देने पर पहले से दिए गए वेतन की वसूली न की जाए.

मांग पूरी होने तक हड़ताल जारी
जूनियर डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक हड़ताल जारी रहेगी. हड़ताल से राज्य भर में स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका है, खासकर OPD और नियमित जांच-उपचार प्रभावित होंगे. इस बीच सरकार ने हड़ताल खत्म करने और बातचीत के लिए पहल करने की बात कही है, लेकिन डॉक्टरों ने साफ कर दिया है कि इस बार केवल आश्वासन से वे मानने वाले नहीं हैं.

मरीजों को भारी परेशानी
भले ही इमरजेंसी सेवाओं को हड़ताल से दूर रखा गया है, लेकिन इस हड़ताल से मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. फरवरी 2025 में भी पीएमसीएच में चार महीने से स्टाइपेंड नहीं मिलने से जूनियर डॉक्टरों ने हड़ताल किया था और 3 घंटे ओपीडी सेवा बाधित की थी. इस हड़ताल ने दूर-दूर से आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को परेशान कर डाला था. बुधवार को भी मरीजों की समस्याएं बढ़ती दिखी.



Leave a Reply