MUZAFFARPUR

शिक्षक गुरू रहमान सहित कई टीचरों और हजारों छात्रों के खिलाफ पुलिस ने दर्ज की प्राथमिकी, इस मामले में की गई कार्रवाई

पटना : बिहार में दारोगा भर्ती परीक्षा को चुनाव से पहले कराने की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे अभ्यर्थियों का प्रदर्शन अब एक बड़े कानूनी विवाद में बदल गया है। राजधानी पटना के गांधी मैदान थाना क्षेत्र में इस मामले को लेकर एक बड़ी प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है। इस FIR में 9 लोगों को नामजद किया गया है, जबकि 1000 से 1500 अज्ञात पुलिस अभ्यर्थी छात्र-छात्राओं और कई कोचिंग संचालकों को भी आरोपी बनाया गया है। इस घटना ने बिहार की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों और प्रशासन के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है।

नामजद आरोपियों में प्रमुख शिक्षक और कोचिंग संचालक शामिल

दर्ज की गई प्राथमिकी में जिन प्रमुख व्यक्तियों के नाम शामिल हैं, उनमें कई जाने-माने शिक्षक और कोचिंग संचालक हैं। इनमें शिक्षक रोशन आनंद, दीप्ति झा, सुब्रत मोहन, रितेश कुमार, प्रशांत कुमार, कौटिल्य अकादमी के प्रदीप कुमार, साथ ही गुरु रहमान, अमन कुमार और खुशबू पाठक के नाम प्रमुखता से शामिल हैं। इन पर आंदोलन को भड़काने और अवैध रूप से भीड़ जुटाने का आरोप लगाया गया है। इस सूची में बिहार के कई लोकप्रिय शिक्षक शामिल हैं, जो छात्रों के बीच काफी प्रभावशाली माने जाते हैं। इस एफआईआर के बाद कोचिंग जगत में भी हड़कंप मच गया है।

प्रदर्शन और लाठीचार्ज का घटनाक्रम

यह घटना मंगलवार को हुई, जब दारोगा भर्ती परीक्षा के अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर पटना की सड़कों पर उतर आए थे। उनकी मुख्य मांग यह थी कि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले दारोगा भर्ती प्रक्रिया पूरी की जाए। प्रदर्शनकारी गांधी मैदान की ओर बढ़ रहे थे, तभी पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। सूत्रों के अनुसार, स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा, जिसमें कई छात्रों के घायल होने की भी खबरें हैं। इस लाठीचार्ज ने प्रशासन के प्रति छात्रों में भारी आक्रोश पैदा किया।

प्रशांत कुमार की गिरफ्तारी और आगे की कार्रवाई

इस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए नामजद आरोपियों में से एक प्रशांत कुमार को गांधी मैदान थाना क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया है। उनकी गिरफ्तारी के बाद यह आशंका जताई जा रही है कि पुलिस इस मामले में शामिल अन्य नामजद आरोपियों और अज्ञात प्रदर्शनकारियों की पहचान कर उनके खिलाफ भी कार्रवाई करेगी। पुलिस प्रशासन का कहना है कि कानून व्यवस्था भंग करने और सरकारी कार्य में बाधा डालने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। दूसरी ओर, छात्र संगठन और विभिन्न राजनीतिक दल इस कार्रवाई की निंदा कर रहे हैं।

छात्रों और प्रशासन के बीच तनाव

दारोगा बहाली की मांग को लेकर हुआ यह प्रदर्शन और उसके बाद की कानूनी कार्रवाई ने छात्रों और प्रशासन के बीच एक गहरी खाई पैदा कर दी है। छात्र जहां अपनी जायज मांगों को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन करने का अधिकार मांग रहे हैं, वहीं प्रशासन कानून व्यवस्था बनाए रखने की बात कर रहा है। इस घटना से बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लाखों छात्रों के भविष्य को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं, और यह देखना बाकी है कि सरकार और छात्रों के बीच इस गतिरोध का समाधान कैसे निकलता है।

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