बिहार :बिहार की राजनीति इस वक़्त युवाओं की ताक़त के इर्द-गिर्द घूम रही है। राज्य में अब युवाओं की आबादी 58 फीसदी हो गई है और सभी राजनीतिक दल इस बड़े वोट बैंक को अपने पाले में करने के लिए पूरी तरह मज़बूत मोर्चेबंदी कर रहे हैं। इस गेम में राजद ने भी रणनीति कसकर रखी है। पार्टी इस बार टिकट वितरण में युवाओं को तरजीह देगी और कई पुराने नेताओं की सीट काटकर नए, जिताऊ युवा नेताओं को मैदान में उतारने का निर्णय लिया है। हालांकि, यह भी संभावना है कि वरिष्ठ नेताओं के करीबी ही चुनावी ताल ठोकें।

पार्टी सूत्रों का कहना है कि जबसे तेजस्वी यादव नेता प्रतिपक्ष बने हैं, युवाओं को पार्टी में विशेष तवज्जो मिलने लगी है। हर मंच और फोरम में युवाओं की टोली नज़र आती है। तेजस्वी के सिपहसलार के रूप में युवा प्रवक्ता विपक्षी नेताओं को ताक़तवर जवाब देते हैं। इसी ब्रिगेड को आगे बढ़ाते हुए पार्टी ने इस बार युवा चेहरे पर दांव लगाने का निश्चय किया है। राजद का मक़सद केवल चुनावी जीत नहीं, बल्कि यह संदेश देना भी है कि अगर पार्टी सत्ता में आई तो नई पीढ़ी के लिए योजनाओं और अवसरों की सौगात आएगी। इसके लिए पार्टी ने युवा केंद्रित अभियान और कार्यक्रम चलाए हैं।


युवा राजद के प्रदेश अध्यक्ष राजेश यादव का कहना है कि इस बार विस चुनाव में युवाओं की निर्णायक भूमिका होगी। पार्टी ने उन्हें वैचारिक, सांगठनिक और धारदार प्रशिक्षण दिया है।राजद की रणनीति स्पष्ट है युवाओं को मंच देना, उन्हें सशक्त करना और चुनावी लड़ाई में दबदबा बढ़ाना। तेजस्वी यादव की अगुवाई में यह युवा मोर्चा 2025 में पार्टी की जीत की कुंजी बन सकता है।



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