पटना: बिहार में चौथे चरण की शिक्षक बहाली (TRE-4) की मांग को लेकर अभ्यर्थी पटना की सड़कों पर उतरे हैं. लंबे समय से परीक्षा का इंतजार कर रहे अभ्यर्थी छात्र नेता दिलीप के नेतृत्व में पटना कॉलेज कैंपस से मार्च पर निकले. यह काफिला भिखना पहाड़ी होते हुए डाकबंगला चौराहे की ओर बढ़ रहा है. यहां पुलिस ने अभ्यर्थियों को हटाने के लिए लाठीचार्ज भी किया है. हजारों की संख्या में जुटे अभ्यर्थी सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुराने ट्वीट का कटआउट हाथों में लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं.

सीएम के निर्देश के बाद परीक्षा नहीं
ट्वीट में मुख्यमंत्री ने लाखों पदों पर शिक्षक बहाली का वादा किया था. अभ्यर्थियों का कहना है कि मुख्यमंत्री हमेशा युवाओं और छात्रों के हित की बात करते हैं, लेकिन अधीनस्थ अधिकारी जानबूझकर परीक्षा में देरी कर उनकी छवि धूमिल कर रहे हैं. परीक्षा समय पर ना होने से ना केवल बेरोजगारों की परेशानियां बढ़ रही हैं, बल्कि उनकी तैयारी और भविष्य पर भी असर पड़ रहा है.
डोमिसाइल से पहले लाखों पदों पर होती थी बहाली
डोमिसाइल नीति पर भी विवाद गहराता दिखा है. छात्रों का आरोप है कि जब डोमिसाइल नीति लागू नहीं थी, तब लाखों पदों पर बहाली की बातें की जाती थीं. कभी 50 हजार तो कभी 80 हजार और फिर 1.20 लाख पदों तक का दावा किया गया.

रिक्ति की संख्या कम
जैसे ही डोमिसाइल लागू हुआ, वैकेंसी में भारी कटौती कर दी गई. अब शिक्षा मंत्री सिर्फ 27,910 पदों की बात कर रहे हैं. अभ्यर्थियों का आरोप है कि पहले बाहर के उम्मीदवारों को मौका देने के लिए आंकड़े बढ़ाए जाते थे और अब बिहार के युवाओं के साथ छल किया जा रहा है.
1.20 लाख पदों पर चाहिए बहाली
छात्र नेता दिलीप ने कहा कि मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के बयानों के मुताबिक 1.20 लाख पदों पर बहाली होनी चाहिए. अगर सरकार सिर्फ 27 हजार पदों पर परीक्षा कराना चाहती है तो यह युवाओं के साथ धोखा होगा. उन्होंने कहा कि छात्र आधी-अधूरी वैकेंसी को स्वीकार नहीं करेगी. आंदोलन को और तेज किया जाएगा.

प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने की बेरिकेटिंग
प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने जेपी गोलंबर पर बैरिकेडिंग कर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी है. भीड़ बढ़ने के कारण बेली रोड और आसपास के इलाकों में जाम की स्थिति भी बन गई. आंदोलन से साफ है कि शिक्षक बहाली चौथे चरण का मुद्दा अब सिर्फ रोजगार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह बिहार की राजनीति का बड़ा सवाल बन गया है.



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