जमुई : अनंत चतुर्दशी का पर्व इस बार आज शनिवार को मनाया जा रहा है. इस दिन भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा का विशेष महत्व है.

भगवान विष्णु की विशेष पूजा
अनंत चतुर्दशी के दिन गौरी-गणेश के साथ शयन कर रहे भगवान विष्णु की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. पूजन के बाद 14 गांठ वाला ‘अनंत सूत्र’ बांह में बांधा जाता है. मान्यता है कि इस व्रत से संकटों और विपत्तियों से मुक्ति मिलती है.

पूजा का शुभ मुहूर्त
शुभ मुहूर्त सुबह 8:15 से 11:15 बजे तक और 11:35 से 2:55 बजे तक रहेगा. पंडित आचार्य ने बताया कि पूरे दिन भक्ति भाव से पूजा की जा सकती है. मान्यता है कि वनवास के दौरान पांडवों ने 14 वर्षों तक भगवान अनंत की पूजा करके विपत्तियों से मुक्ति पाई थी. तभी से यह परंपरा पीढ़ी-दर-पीढ़ी चल रही है.

अनंत चौदस और गणेश विसर्जन
अनंत चतुर्दशी को अनंत चौदस भी कहा जाता है. इस दिन भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा और गणेश प्रतिमा विसर्जन की परंपरा भी निभाई जाती है.

पूजन की विधि
अनंत चतुर्दशी के दिन पूजन की शुरुआत स्नान-ध्यान से होती है. प्रातःकाल शुभ मुहूर्त में स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण किए जाते हैं और संकल्प लिया जाता है. इसके बाद पूजन स्थान पर आम की लकड़ी की बनी चौकी रखकर उस पर पीला कपड़ा बिछाया जाता है. चौकी पर कलश स्थापित कर कुशा से भगवान विष्णु की आकृति बनाकर ध्यान किया जाता है.

14 गांठ वाले अनंत सूत्र का महत्व
पूजन के लिए फल, फूल, चावल, रोली, हल्दी और प्रसाद सामग्री अर्पित की जाती है. इस दिन डंटी वाले खीरे और चौदह गांठों वाले अनंत सूत्र का विशेष महत्व होता है. खीरे में अनंत सूत्र बांधकर उसे दूध, दही, घी और मिश्री से बने पात्र में रखकर मंथन किया जाता है. मान्यता है कि इस मंथन से प्राप्त अमृत को श्रद्धालु चरणामृत के रूप में ग्रहण करते हैं. भगवान विष्णु और गणपति की पूजा के उपरांत धूप-दीप दिखाकर आरती की जाती है और अनंत चतुर्दशी की कथा सुनी जाती है. पूजन के बाद अनंत सूत्र पुरुष दाहिने हाथ में और महिलाएं बाएं हाथ में धारण करती हैं. इसके बाद प्रसाद का वितरण किया जाता है और श्रद्धालु स्वयं ग्रहण करते हैं.



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