पटना: एक तरफ बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कभी भी हो सकता है तो वहीं दूसरी तरफ एनडीए पीएम मोदी और उनकी मां पर अपमानजनक टिप्पणी को लेकर सियासी पारा हाई किए हुए है. वहीं अब आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव ने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट कर आग में घी डाल दिया है.

लालू का पीएम मोदी पर हमला
लालू यादव ने शुक्रवार को सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट करते हुए लिखा कि ऐ मोदी जी, विक्ट्री चाहिए बिहार से और फैक्ट्री दीजिएगा गुजरात में? ये गुजराती फार्मूला बिहार में नहीं चलेगा.

‘बिहार को हल्के में न लें’
लालू यादव ने इससे पहले भी पीएम मोदी को गाली दिए जाने को लेकर बीजेपी के बुलाए गए बंद पर हमला किया था. उन्होंने सोशल मीडिया में लिथा था कि क्या प्रधानमंत्री मोदी ने भाजपाइयों को आदेश दिया है कि आज पूरे बिहार और बिहारियों की माताओं-बहनों और बेटियों को गाली दो? गुजराती लोग बिहारियों को इतने हल्के में ना लें?
तेजस्वी ने पूछे थे 10 सवाल
वहीं पीएम मोदी को गाली देने के विवाद के बाद आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने पीएम मोदी पर हमला करते हुए उनसे 10 सवाल किए थे. इस दौरान उन्होंने पीएम मोदी पर पाखंड करने का आरोप भी लगाया था. वहीं उनके पुराने बयानों का जिक्र करते हुए कहा था कि किसी की भी मां हो, मां तो मां होती है.

‘मेरी मां को भद्दी-भद्दी गाली दी’
पीएम मोदी हुए थे भावुक: बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2 सितंबर को उनकी मां को दरभंगा में कांग्रेस के मंच से गाली देने के मामले को लेकर विपक्ष पर हमला किया था. इस दौरान वे भावुक नजर आए थे. उन्होंने कहा था कि बिहार में जो हुआ था, उसकी मैंने कभी कल्पना नहीं की थी. आरजेडी- कांग्रेस के मंच से मेरी मां को भद्दी-भद्दी गालियां दी गई.
‘बिहारवासियों को पीड़ा’
पीएम मोदी ने कहा था कि ये गालियां सिर्फ मेरी मां का अपमान नहीं है, ये देश की मां, बहन और बेटियों का अपमान है. मुझे पता है कि आप सबको भी बिहार की हर मां, बेटी और भाई को ये सुनकर कितना बुरा लगा है. मैं जानता हूं कि इसकी जितनी पीड़ा मेरे दिल में है, उतनी ही पीड़ा बिहार के लोगों को भी है.

लालू ने दी बधाई
वहीं लालू यादव ने एक और पोस्ट कर मिलादुन्नबी की मुबारकबाद दी है. उन्होंने लिखा है कि तमाम अहले वतन को पैगंबर मुहम्मद साहब की यौमे विलादत-ईद-मिलादुन्नबी की दिली मुबारकबाद. हम सब अहद करें कि नबी -ए-करीम के बताए हुए रास्ते और हमदर्दी, आलमी भाईचारा, इंसानियत और रवादारी की तालीमत इंसानियत के लिए रहनुमाई उसूल हों.



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