मुजफ्फरपुर: जिले में लंपी स्किन डिजीज का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है. गायों और बछड़ों को प्रभावित करने वाली इस संक्रामक बीमारी से अब तक कई पशुओं की मौत हो चुकी है. जिले के विभिन्न प्रखंडों में बीमारी तेजी से फैल रही है, जिससे पशुपालकों की चिंताएं बढ़ गई है.

लंबी वायरस का कहर
पशुपालन विभाग ने रोग नियंत्रण के लिए विशेष अभियान शुरू किया है. लंपी रोग का सबसे अधिक प्रभाव जिले के कुढ़नी, मड़वन, कांटी, सकरा, मुशहरी और मुरौल प्रखंडों में देखा जा रहा है. मड़वन प्रखंड की लगभग सभी 14 पंचायतें इस बीमारी की चपेट में हैं. यहां दर्जनों पशुओं की मौत हो चुकी है और कई बीमार पड़े हैं.

दूध उत्पादन में गिरावट
पशुपालकों का कहना है कि पिछले कुछ हफ्तों में हालात और गंभीर हो गए हैं. स्थानीय किसानों ने बताया कि बीमारी के कारण गायों के दूध उत्पादन में भारी गिरावट आई है. पहले जहां एक गाय 8 से 10 लीटर दूध देती थी, वहीं अब यह घटकर 4 से 5 लीटर तक रह गया है. इससे न सिर्फ किसानों की आय पर असर पड़ा है बल्कि बाजार में दूध की सप्लाई भी प्रभावित हुई है.
जुलाई में भी फैली थी बीमारी
यह बीमारी जुलाई 2025 में भी मुशहरी, सकरा और कुढ़नी प्रखंडों में तेजी से फैली थी. उस दौरान भी कई दुधारू पशु प्रभावित हुए थे और दूध उत्पादन में भारी कमी आई थी. उस वक्त सरकारी टीकाकरण पर्याप्त न होने के कारण किसान निजी इलाज पर निर्भर रहे. अब एक बार फिर यह रोग तेजी से फैल रहा है और इस बार स्थिति ज्यादा गंभीर बताई जा रही है.

भ्रमणशील चिकित्सा वाहन रवाना
जिला पशुपालन विभाग के अनुसार मुजफ्फरपुर जिले में कुल लगभग 4 लाख गायें हैं, जिनमें से करीब 3 लाख का टीकाकरण हो चुका है. विभाग ने प्रभावित इलाकों में भ्रमणशील चिकित्सा वाहन भेजे हैं. ये मोबाइल यूनिट्स गांव-गांव जाकर कैंप लगा रही हैं और बीमार पशुओं का इलाज कर रही हैं.

पशुपालन विभाग ने विशेष रूप से प्रभावित प्रखंडों में टीमें तैनात की हैं. साथ ही, किसानों को जागरूक किया जा रहा है कि वे बीमार और स्वस्थ पशुओं को अलग रखें, ताकि संक्रमण न फैले. जिला पशुपालन पदाधिकारी डॉ. मनोज कुमार मेहता ने बताया कि लंपी स्किन डिजीज एक गंभीर बीमारी है. यह इंसानों में होने वाली माता (चेचक) जैसी होती है. यदि मवेशी को पहले से वैक्सीन नहीं लगी है और उसे यह बीमारी हो जाती है, तो उसे तुरंत वैक्सीन नहीं लगानी चाहिए.
पशुओं का रखें ऐसे ख्याल
पशु चिकित्सकों का कहना है कि मवेशी को पौष्टिक आहार दें और उसका इम्युन सिस्टम मजबूत रखें. बीमार और स्वस्थ पशुओं को अलग-अलग रखें. उन्होंने यह भी बताया कि रोग से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका समय पर टीकाकरण है. इसलिए जिन पशुओं में यह बीमारी नहीं है, उनका तुरंत टीकाकरण कराना चाहिए.

चलाया जा रहा टीकाकरण अभियान
इसी तरह सकरा प्रखंड की किसान महिला मीना देवी ने कहा कि बीमारी के कारण उनके परिवार की रोज़ाना की आमदनी पर असर पड़ा है. दूध बेचकर परिवार का खर्च चलता था, लेकिन अब हालत बिगड़ गई है. पशुपालन विभाग ने दावा किया है कि जिले में तेजी से टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है. विभाग का लक्ष्य है कि शेष बचे पशुओं का जल्द से जल्द टीकाकरण पूरा कर दिया जाए.

बीमारी के लक्ष्ण
लम्पी एक वायरल स्किन डिजीज बीमारी है. इसके चलते पशुओं में तेज बुखार के लक्षण देखें जा सकते हैं. इसके साथ ही आंख, नाक से पानी गिरना, पैरो में सूजन, कठोर और चपटी गांठ से पूरा शरीर का ढक जाना या सांस लेने में समस्या हो सकती है.



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