MUZAFFARPUR

14 बार पार्टी बदली, तीसरी बार कमल थामा.. जानें कौन हैं भाजपा के ‘नागमणि’

पटना: पूर्व केंद्रीय मंत्री नागमणि बिहार की राजनीति में चर्चित नाम हैं. कुशवाहा सियासत की जब बात होती है तो नागमणि का नाम लिया जाता है. नागमणि शहीद जगदेव के पुत्र हैं और अपने पिता की राजनीतिक विरासत को नागमणि संभाल रहे हैं. कई दलों में रहने के बाद नागमणि ने अपना एक दल बनाया था, लेकिन नागमणि अंतिम पारी खेलने भाजपा में आए हैं.

भाजपा में शामिल हुए नागमणि

पूर्व केंद्रीय मंत्री नागमणि की उम्र 70 साल के आसपास है, लेकिन राजनीति में उनकी सक्रियता बनी हुई है. बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले नागमणि ने अपनी पत्नी सुचित्रा सिंह के साथ नई पारी खेलने के लिए भाजपा का दामन थामा है. नागमणि बिहार के एक ऐसे नेता हैं, जिनके नाम दल बदल का रिकॉर्ड कायम है. वह दर्जन बार से अधिक बार दल बदल चुके हैं और अब 14वीं बार में बीजेपी आए हैं. इस बार नागमणि ने भाजपा के साथ मरने जीने की कसम खाई है.

‘बीजेपी के लिए करते रहेंगे काम’

पूर्व केंद्रीय मंत्री नागमणि ने कहा कि बिहार में डबल इंजन की सरकार है और डबल इंजन की सरकार ही बिहार को तरक्की के राह पर ले जा सकती है. हम बिना शर्त भाजपा के साथ आए हैं और भाजपा को मजबूत करने के लिए हम काम करते रहेंगे.

पत्नी सुचित्रा सिन्हा ने भी ली सदस्यता

पूर्व केंद्रीय मंत्री नागमणि ने भाजपा के प्रदेश कार्यालय में तमाम शीर्ष नेताओं के समक्ष भाजपा की सदस्यता ली. नागमणि के साथ उनकी पत्नी सुचित्रा सिन्हा ने भी पार्टी की सदस्यता ली. पार्टी की सदस्यता लेने के बाद नागमणि ने कहा कि मैंने कई दलों में रहकर सियासत की है, लेकिन अब वह भाजपा में ही रहेंगे और अंतिम सांस तक वह भाजपा की सियासत करेंगे.

‘अटल जी ने मुझे लालू को हटाने का टास्क दिया था’

नागमणि ने अपने संबोधन में कहा कि हमने पांच राज्यसभा सांसद और तीन संसद को तोड़कर अटल बिहारी वाजपेयी सरकार को समर्थन दिया था. अटल बिहारी वाजपेयी ने मुझे केंद्र में मंत्री भी बनाया था. मुझे अटल बिहारी वाजपेयी ने बिहार से लालू को सत्ता से हटाने का टास्क सौंपा था. मैंने लोक जनशक्ति पार्टी ज्वाइन किया और टिकट बंटवारे के समय वहां बड़ी संख्या में यादवों और मुसलमानों को टिकट दिया जिसके चलते लालू प्रसाद यादव सत्ता से बाहर हुए.

14वीं बार दल बदल

बिहार में नागमणि एक ऐसे नेता के रूप में चर्चित हैं, जो राजनीति के पिच पर टिक कर नहीं खेलते हैं. अब तक राजनीति में नागमणि ने 14 बार दल बदल का खेल किया है. नागमणि ने अपने राजनीतिक कैरियर की शुरुआत पिता द्वारा बनाई गई पार्टी शोषित समाज दल से की.

तीसरी बार बीजेपी में गए

वह दो बार राष्ट्रीय जनता दल, दो बार कांग्रेस, दो बार जनता दल यूनाइटेड और दो बार भाजपा में रहे. तीसरी बार नागमणि ने भाजपा का दामन थामा है. नागमणि ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और रालोसपा की सियासत भी की है. पिछले विधानसभा चुनाव में नागमणि ने उपेंद्र कुशवाहा को मुख्यमंत्री बनाने के लिए संघर्ष किया था.

सुचित्रा सिन्हा के बारे में जानें

नागमणि अपने राजनीतिक कैरियर के चरम पर तब थे, जब वह 1999 में राष्ट्रीय जनता दल के टिकट पर चतरा से लोकसभा चुनाव जीते. अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में नागमणि को मंत्री बनने का मौका भी मिला. नागमणि की पत्नी सुचित्रा सिन्हा भी राजनीति में सक्रिय रही हैं और नीतीश कुमार के सरकार में सुचित्रा सिन्हा मंत्री भी रह चुकी हैं. सुचित्रा सिंह नागमणि के साथ राजनीति में कदम से कदम मिलाकर चलती दिखी हैं.

प्रशांत किशोर से मोह भंग

साल 2023 में नागमणि ने शोषित इंकलाब पार्टी का गठन किया और पार्टी को मजबूत करने की कोशिश की, लेकिन जल्द ही उन्होंने फैसले में बदलाव किया और वह प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज में शामिल हो गए. जल्द ही नागमणि का मोह प्रशांत किशोर से भंग हो गया और अंततः उन्होंने भाजपा में शामिल होने का मन बना लिया.

‘ चुनाव लड़ने की कोई शर्त नहीं है’

भाजपा में रहकर नागमणि पार्टी को बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात में मजबूत करना चाहते हैं. इस बात का आश्वासन नागमणि ने पार्टी को दिया है. उन्होंने यह भी कहा है कि पार्टी से कोई डील नहीं हुई है ना ही वह विधानसभा चुनाव लड़ने के शर्त पर पार्टी में आए हैं.

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