MUZAFFARPUR

‘मेयर-डिप्टी मेयर का चुनाव रद्द हो..’ अपने अधिकार के लिए पार्षदों का JDU ऑफिस पर हल्ला बोल

पटना: सोमवार को राजधानी पटना की सड़कों पर बिहार के विभिन्न नगर निकायों के सैकड़ों वार्ड पार्षदों ने अपनी मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया. बिहार पार्षद अधिकार महासंघ के बैनर तले निकले पार्षदों ने दरोगा राय चौक से सड़क मार्च की शुरुआत की और वीरचंद पटेल पथ पर स्थित जेडीयू कार्यालय के सामने आकर घंटों धरना दिया. पुरुष पार्षदों के साथ-साथ महिला पार्षदों की भी बड़ी संख्या इस आंदोलन में मौजूद रही.

‘हमें हमारा अधिकार चाहिए’

प्रदर्शन के दौरान पार्षदों ने साफ-साफ कहा कि जनता से चुनकर आने के बावजूद उनके अधिकार लगातार छीने जा रहे हैं.

सबसे बड़ी नाराजगी इस बात को लेकर रही कि अब मुख्य पार्षद (मेयर/अध्यक्ष) और उप मुख्य पार्षद (डिप्टी मेयर/उपाध्यक्ष) चुनने का अधिकार सीधे जनता को दे दिया गया है, जबकि पहले यह अधिकार नगर निकाय के पार्षदों के पास था. अब पार्षदों का काम मुख्य पार्षद नहीं कर रहे हैं और काम को टरका रहे हैं, जिससे जनता की शिकायतें बढ़ रही हैं.

मुख्य पार्षद चुनने का अधिकार वापस करे सरकार

पटना नगर निगम के पार्षद जीत कुमार चंद्रवंशी ने कहा कि वह चाहते हैं कि पहले की तरह मेयर और डिप्टी मेयर का चयन पार्षदों को करने दिया जाए. उन्होंने आरोप लगाया कि जनता से सीधे चुने गए मुख्य पार्षद अब पार्षदों के काम में सहयोग नहीं करते.

हमें दें मुख्य पार्षद चुनने का अधिकार

कटिहार नगर निगम के पार्षद प्रमोद महतो ने भी इसी मांग को दोहराते हुए कहा कि जिस प्रकार विधानसभा में मुख्यमंत्री चुनने का अधिकार विधायकों को होता है, उसी प्रकार नगर निकायों में भी मुख्य पार्षद चुनने का अधिकार पार्षदों को दिया जाए. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर ऐसा नहीं होना है तो फिर मुख्यमंत्री का चुनाव भी जनता द्वारा सीधे कराया जाए.

मुखिया की तरह हमारा भी मानदेय बढ़े

प्रमोद महतो ने मानदेय को लेकर भी असंतोष जताया. उन्होंने कहा कि वार्ड पार्षद को 2500 रुपये मानदेय मिलता है. मुखिया का मानदेय पहले उतना ही था, जिसे अब बढ़ाकर 7500 कर दिया गया है. हमारी मांग है कि पार्षदों का न्यूनतम मानदेय 10000 किया जाए.

हवा बदलने वाली है..

मधुबनी नगर निगम के धर्मवीर प्रसाद ने सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि इस सरकार ने पार्षदों को ठगने का काम किया है. उन्होंने कहा कि जनता से सबसे नजदीक संपर्क रखने वाले जनप्रतिनिधियों को दरकिनार कर दिया गया है. सरकार दोहरी चाल चल रही है लेकिन इस बार जनता भी जवाब देगी. प्रशांत किशोर अब मैदान में आ गए हैं, जो जमीन पर पसीना बहाने वाले नेताओं की मेहनत को जानते हैं. अब समीकरण बदलने वाला है.

पार्षदों के लिए भी पेंशन का प्रावधान हो

मुजफ्फरपुर नगर निगम की पार्षद गनीता देवी ने कहा कि महिला पार्षदों के लिए निगम में कोई सुरक्षा व्यवस्था नहीं है. उनके पास बैठने या काम करने के लिए कोई चैंबर नहीं है. मानदेय भी मात्र 2500 मिलता है. सांसद और विधायकों को पेंशन मिलता है. ऐसे में पार्षदों के लिए भी पेंशन का भी प्रावधान होना चाहिए, क्योंकि वार्ड पार्षद भी जमीनी स्तर के जनप्रतिनिधि हैं. दरभंगा नगर निगम की पार्षद चांदनी देवी ने भी यही मांग दोहरायी.

 

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