पटना: सीतामढ़ी के पुनौरा धाम में मां जानकी के भव्य मंदिर का निर्माणशुरू हो चुका है. बिहार के पर्यटन में तो चार चांद लगेगा ही लेकिन विधानसभा चुनाव में जानकी मंदिर मिथिलांचल में एनडीए को और ताकत देगा. बिहार में पिछले कई चुनाव से मिथिलांचल में एनडीए का दबदबा दिखा है. लोकसभा और विधानसभा की अधिकांश सीटों पर एनडीए का कब्जा है. महागठबंधन के लिए मिथिलांचल सरकार बनाने में सबसे बड़ा रोड़ा है. ऐसे में जानकी मंदिर मिथिलांचल के 18 जिलों में अपना प्रभाव दिखाएगा.

मंदिर से सत्ता में आएगा एनडीए?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ही घोषणा की थी कि सीतामढ़ी के पुनौरा धाम में भव्य माता सीता के मंदिर का निर्माण होगा और 8 अगस्त को उन्होंने निर्माण की नींव रख दी है. कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी मौजूद थे. मंदिर निर्माण के लिए बिहार कैबिनेट में 882.87 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी थी. उससे पहले भी सीतामढ़ी के पुनौरा धाम के विकास के लिए सरकार ने बड़ी राशि की व्यवस्था की है. कुल मिलाकर देखें तो हजार करोड़ से अधिक की राशि मंदिर और परिसर के विकास पर खर्च के लिए व्यवस्था की गई है.

मिथिलांचल में है एनडीए का जलवा
मिथिलांचल में मां जानकी के मंदिर का खास महत्व है और इसे भी अयोध्या के राम मंदिर की तर्ज पर भव्य बनाया जा रहा है. बिहार में चुनाव में वोट जातीय समीकरण के आधार पर होता रहा है लेकिन कई बार धार्मिक मुद्दे भी प्रभावी ढंग से अपना काम करते हैं. उत्तर बिहार और खासकर मिथिलांचल में एनडीए की पकड़ है. पिछले साल 2024 में हुए लोकसभा चुनाव में उत्तर बिहार के अधिकांश सीट पर एनडीए ने कब्जा जमाया है. मिथिलांचल में 18 जिले की बात कही जाती है और उसमें से केवल तीन जिले में आने वाले पूर्णिया, कटिहार और किशनगंज संसदीय सीट ही महागठबंधन के पास है. यानी 15 जिलों में एनडीए का झंडा लहरा रहा है.

170 से अधिक विधानसभा सीटों पर डालेगा असर
2020 विधानसभा चुनाव में भी मिथिलांचल में एनडीए का शानदार प्रदर्शन रहा है. ऐसे में एनडीए अपने इस किले को और मजबूत करने में लगा है. मां जानकी का मंदिर एनडीए के लिए बड़ा मददगार होने वाला है. राजनीतिक विशेषज्ञ प्रिय रंजन भारती का कहना है कि अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण से जिस प्रकार बीजेपी को लाभ मिला है, उसी तरह मां जानकी का मंदिर भी बिहार में एनडीए को फिर से सत्ता की चाबी दिला सकता है. उत्तर बिहार में 170 से अधिक विधानसभा की सीटें हैं, जिस पर सीधा असर पड़ेगा.
मिथिलांचल को मोदी सरकार की कई सौगातें
दरभंगा में एयरपोर्ट और एम्स , पूर्णिया में एयरपोर्ट, मिथिलांचल के मखाने के लिए मखाना बोर्ड, बाढ़ प्रबंधन के लिए विशेष राशि की व्यवस्था, सड़क पुल की कई परियोजना जैसे काम किए गए हैं, जिसका पहले से असर दिख रहा है और अब चिर परिचित मां जानकी मंदिर का निर्माण एनडीए के वोट बैंक में इजाफा करेगा. वोट बैंक के ध्रुवीकरण में भी राम जानकी मंदिर एनडीए के लिए मददगार साबित होगा.

क्या यूपी की तरह बिहार में लाभ मिलेगा?
वहीं, एएन सिन्हा इंस्टीट्यूट के पूर्व निदेशक डीएम दिवाकर का कहना है कि बीजेपी पहले से मंदिर मस्जिद को चुनाव में अपने लिए इस्तेमाल करती रही है. मिथिलांचल के लोगों के लिए राम जानकी का मंदिर भावनात्मक रूप से भी जुड़ा हुआ है. अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद इस क्षेत्र के लोगों की मांग भी थी. ऐसे में मिथलांचल के लोग को अपने पक्ष में बीजेपी करने की भरपूर कोशिश करेगी. विधानसभा चुनाव में लाभ मिले, इसलिए चुनाव से पहले निर्माण शुरू भी करवाया गया है.
बिहार के पर्यटन की बदल जाएगी सूरत
बिहार सरकार के भवन निर्माण मंत्री जयंत राज का कहना है कि जानकी मंदिर से बिहार के पर्यटन की सूरत बदल जाएगी. जिस प्रकार से अयोध्या में राम मंदिर बनने के बाद पर्यटन का व्यवसाय काफी फल-फूल रहा है. जानकी मंदिर के निर्माण से न केवल सीतामढ़ी, बल्कि बिहार में बड़ी संख्या में लोग देश-विदेश से भी पहुंचेंगे. बिहार के लोगों को बड़े पैमाने पर रोजगार भी मिलेगा.

महागठबंधन के लिए बड़ा चैलेंज
पटना कॉलेज के पूर्व प्राचार्ज प्रोफेसर क चौधरी का कहना है कि जब 2020 विधानसभा चुनाव की बात करते हैं तो एनडीए और महागठबंधन के वोट प्रतिशत में केवल 0.03% का अंतर था. कुल वोटों का अंतर 12000 के करीब था. मिथिलांचल में जिस प्रकार से एनडीए के पक्ष में वोटिंग हुई और महागठबंधन की सरकार बनती-बनती रह गई.

मिथिलांचल से तय होगा परिणाम?
कुल मिलाकर देखें तो मिथिलांचल के कारण ही बिहार में 2020 में एनडीए की सरकार बन पाई थी. तेजस्वी यादव और राहुल गांधी के लिए एनडीए के मजबूत किले को चैलेंज देना अब और चुनौतीपूर्ण बन गया है, क्योंकि 2024 लोकसभा चुनाव की बात करें तो एनडीए को महागठबंधन से 9.05 % अधिक वोट मिला था और इसका बड़ा कारण मिथिलांचल ही था. जहां लोगों ने भरपूर समर्थन एनडीए के पक्ष में दिया.

बीजेपी-जेडीयू का कब्जा
मिथिलांचल के 5 बड़े जिलों की बात करें तो कुल 49 विधानसभा की सीटे हैं, जिसमें से 34 पर एनडीए का कब्जा है. वहीं महागठबंधन को केवल 15 सीट मिली है. इस बार एनडीए की तरफ से उसे भी जीतने की तैयारी है. दरभंगा की 10 में से 9 पर एनडीए का कब्जा है. मधुबनी की 10 में से 8 पर एनडीए का कब्जा है. मुजफ्फरपुर की 11 सीटों में से 6 पर एनडीए का कब्जा है. समस्तीपुर की 10 विधानसभा में से 5 पर एनडीए का कब्जा है और सीतामढ़ी की 8 सीटों में से 6 पर एनडीए का कब्जा है.



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