MUZAFFARPUR

राखी कब बांधें, कितने बजे? 9 अगस्त को रक्षाबंधन पर जानें हर जरूरी जानकारी

बिहार समेत देशभर में 9 अगस्त शनिवार को रक्षाबंधन, श्रावणी उपाकर्म (जनेऊ संस्कार) और पूर्णिमा व्रत का त्रिवेणी संगम अत्यंत शुभ संयोग लेकर आ रहा है।

पंचांग के अनुसार मुहूर्त

पूर्णिमा आरंभ:शुक्रवार रात 1:50 बजे से

पूर्णिमा समाप्ति:शनिवार दोपहर 1:23 बजे तक

भद्रा काल:शनिवार रात 1:40 बजे तक रहेगा (पाताल लोक में रहेगा, अतः बाधक नहीं)

राखी बांधने का श्रेष्ठ समय

शनिवार 9 अगस्त को सुबह 6:32 से दोपहर 1:23 बजे तक

इस समय श्रवण (विजय) नक्षत्र, आयुष्मान और सौभाग्य योग, भव करण व औदायिका का स्थिर योग रहेगा। साथ ही शनि की कुंभ राशि का संयोग भाई-बहन के रिश्ते को मजबूती देगा। बहनों को भाई की दाईं कलाई पर राखी बांधनी चाहिए, और भाई उन्हें स्नेह स्वरूप उपहार दें।ब्राह्मणगण अपने यजमानों को रक्षा सूत्र बांधें, और यजमान दक्षिणा प्रदान करें।श्रावणी उपाकर्म के दिन ब्राह्मणों को यज्ञोपवीत (जनेऊ) संस्कार कराना भी शुभ होता है।

मान्यता है कि देवासुर संग्राम में इंद्र की पत्नी इंद्राणी ने उन्हें रक्षा सूत्र बांधा था। वहीं लक्ष्मी जी ने राजा बली को राखी बांधकर भगवान विष्णु को मुक्त कराया था।18वीं शताब्दी में महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने नेपाल नरेश को राखी व भगवान पशुपतिनाथ की पूजा सामग्री भेजी थी।प्रसन्न होकर नेपाल नरेश ने उपहार मांगने की बात कही।इस पर महारानी ने कहा कि यदि कुछ देना चाहें, तो पशुपतिनाथ मंदिर की प्रथम पूजा मेरी ओर से होनी चाहिए।यह परंपरा आज भी नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर में जीवंत है, जहां भारतीय ब्राह्मण पंडा महारानी की ओर से पूजा करते हैं।

रक्षाबंधन न केवल बहन-भाई के प्रेम का प्रतीक है, बल्कि यह धर्म और संस्कृति की रक्षा का संकल्प भी है।यह पर्व हमें संस्कारों की रक्षा, रिश्तों की मर्यादा और परंपरा के निर्वाह की प्रेरणा देता है। श्रावणी उपाकर्म और रक्षा सूत्र पूजन से जुड़ी प्राचीन परंपराएं आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं।

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