MUZAFFARPUR

बिहार में ह’थियार त’स्करी में शामिल सरकारी बाबू गि’रफ्तार! मृ’त लोगों के नाम पर देता था लाइसेंस

खगड़िया: बिहार के खगड़िया जिले में अवैध हथियार तस्करी के एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है. इस मामले में खगड़िया समाहरणालय में आर्म्स सेक्शन में तैनात डाटा ऑपरेटर अविनाश कुमार को पुलिस ने बीती रात गिरफ्तार किया. पूर्णिया के केहाट थाना पुलिस और विशेष कार्य बल (एसटीएफ) की संयुक्त कार्रवाई में यह गिरफ्तारी हुई.

अविनाश कुमार पर क्या है आरोप?

अविनाश कुमार पर आरोप है कि वह पैसे लेकर मृत हथियार लाइसेंस धारियों के दस्तावेज हथियार तस्करों को मुहैया कराता था. इन दस्तावेजों का उपयोग अवैध कारतूस खरीदने में किया जाता था. इस रैकेट के जरिए तस्कर मृत व्यक्तियों के नाम पर लाइसेंस का दुरुपयोग कर हथियार और कारतूस की अवैध खरीद-बिक्री करते थे.

रैकेट का खुलासा कैसे हुआ?

इस रैकेट का पर्दाफाश 11 जुलाई 2025 को तब हुआ, जब पटना एसटीएफ ने हाजीपुर रेलवे स्टेशन पर छापेमारी के दौरान पांच अपराधियों को गिरफ्तार किया. इनके पास से भारी मात्रा में अवैध कारतूस, आर्म्स लाइसेंस बुक और इससे जुड़े अन्य सामान बरामद हुए. पूछताछ में अपराधियों ने बताया कि यह लाइसेंस बुक खगड़िया निवासी जगदीश प्रसाद निराला के नाम पर थी, जिनकी मृत्यु जुलाई 2024 में हो चुकी थी.

अवैध कारतूस की खरीद-बिक्री का खेल

गिरफ्तार अपराधियों ने खुलासा किया कि वे मृत व्यक्ति जगदीश प्रसाद निराला के लाइसेंस का उपयोग कर पूर्णिया के विशाल गन हाउस से अवैध कारतूस खरीदते थे. इन कारतूसों को बाद में हाजीपुर बाजार में बेचा जाता था. इस खुलासे के बाद पूर्णिया के विशाल गन हाउस के मालिक इंद्रजीत कुमार का नाम सामने आया था.

अविनाश कुमार के नाम का कैसे हुआ खुलासा

इंद्रजीत कुमार की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने विशाल गन हाउस में हथियारों की खरीद-बिक्री की जांच की. इस दौरान खगड़िया समाहरणालय में तैनात डाटा ऑपरेटर अविनाश कुमार का नाम सामने आया. इंद्रजीत ने पुलिस को बताया कि मृत व्यक्तियों के लाइसेंस अविनाश कुमार ही उपलब्ध कराता था. अविनाश ने मृत व्यक्तियों के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर तस्करों को अवैध कारतूस खरीदने में मदद की.

क्या कहती है पुलिस?

चित्रगुप्त नगर थाना के थानाध्यक्ष सिंटू कुमार ने बताया कि अविनाश कुमार और इंद्रजीत कुमार लंबे समय से मिलकर अवैध हथियार तस्करी में शामिल थे. अविनाश ने खगड़िया के बैलदौर निवासी सोना बाबू, जगदीश प्रसाद निराला और शेखपुरा के एक अन्य मृत व्यक्ति के लाइसेंस इंद्रजीत को दिए थे. इन लाइसेंसों का उपयोग कर जून 2025 में विशाल गन हाउस से जगदीश प्रसाद निराला के नाम पर 90 कारतूस जारी किए गए, जबकि उनकी मौत 2024 में हो चुकी थी.

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