पटना: बिहार की सियासत में एक बार फिर आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव का परिवार चर्चा में बना हुआ है. लालू यादव ने अपने बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को पार्टी और परिवार से बेदखल कर दिया था. अब इस फैसले के बाद तेज प्रताप ने महुआ विधानसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान किया, जिसने आरजेडी और बिहार की राजनीति में नई हलचल मचा दी है.

तेज प्रताप का बागी रुख
तेज प्रताप के बागी तेवर और उनकी सक्रियता ने आरजेडी के कई नेताओं की नींद उड़ा दी है, क्योंकि उनका यह कदम पार्टी के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है. तेज प्रताप यादव वर्तमान में समस्तीपुर के हसनपुर से विधायक हैं. उन्होंने घोषणा की है कि वह 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में महुआ सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में उतरेंगे. 2015 में वह महुआ से विधायक चुने गए थे, लेकिन 2020 में उन्होंने हसनपुर सीट चुनी.

महुआ से निर्दलीय लड़ाई
अब तेज प्रताप यादव एक बार फिर महुआ में अपनी किस्मत आजमाने की तैयारी में हैं. तेज प्रताप ने महुआ में सक्रियता बढ़ा दी है और खुलेआम आरजेडी के मौजूदा विधायक मुकेश रोशन को चुनौती दे रहे हैं. हालांकि, मुकेश रोशन ने इस मामले पर चुप्पी साध रखी है और कहा है कि वह पार्टी के फैसले का पालन करेंगे.

यादव वोट बैंक पर खतरा
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि तेज प्रताप यादव के इस बागी तेवर से RJD के कोर वोट बैंक, खासकर यादव और मुस्लिम मतदाताओं, में सेंधमारी हो सकती है. विशेषज्ञ सुनील पांडे के अनुसार, तेज प्रताप की जनसंपर्क मुहिम और उनकी लोकप्रियता, खासकर युवाओं में, आरजेडी को भारी नुकसान पहुंचा सकती है.

क्या एनडीए को होगा फायदा?
तेज प्रताप के बागी तेवर से विपक्षी गठबंधन एनडीए को फायदा होने की संभावना जताई जा रही है. राजनीतिक विश्लेषक प्रिय रंजन भारती का कहना है कि अगर तेज प्रताप निर्दलीय चुनाव लड़ते हैं या नई पार्टी बनाकर कई सीटों पर उम्मीदवार उतारते हैं, तो यह आरजेडी के वोट बैंक को बांट सकता है.

पारिवारिक विवाद और प्रेम प्रसंग का असर
तेज प्रताप यादव की बेदखली का कारण उनका हालिया प्रेम प्रसंग और सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरें बताई जा रही हैं. लालू ने इसे गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार और पारिवारिक मूल्यों के खिलाफ बताते हुए सख्त कदम उठाया.

आरजेडी की छवि को नुकसान
बता दें कि तेज प्रताप ने दावा किया था कि उनका अकाउंट हैक हुआ था, लेकिन यह सफाई काम नहीं आई. इसके अलावा, उनकी पत्नी ऐश्वर्या राय के साथ तलाक का मामला भी लंबे समय से चर्चा में रहा है. ये सभी घटनाएं लालू परिवार की एकता पर सवाल उठा रही हैं और आरजेडी की छवि को नुकसान पहुंचा रही हैं.
आरजेडी की चुप्पी, जेडीयू का तंज
आरजेडी ने तेज प्रताप के मुद्दे पर चुप्पी साध रखी है. पार्टी प्रवक्ता एजाज अहमद ने कहा कि “इस मामले पर बोलने की मनाही है.” दूसरी ओर, जेडीयू प्रवक्ता मनीष यादव ने इसे लालू परिवार की ‘नौटंकी’ करार दिया. मनीष ने कहा कि तेज प्रताप के पास कोई वोट बैंक नहीं है और तेजस्वी यादव का लोकसभा चुनाव में ’40 में 40 सीट’ का दावा खोखला साबित हुआ था. जेडीयू का कहना है कि तेज प्रताप के बागी तेवर से एनडीए को कोई खास फायदा नहीं होगा, क्योंकि उनका प्रभाव सीमित है.

तेज प्रताप की अगली चाल
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि अगर आरजेडी में तेज प्रताप की वापसी नहीं हुई, तो वह नई पार्टी बना सकते हैं. सुनील पांडे का मानना है कि तेज प्रताप अपनी मुहिम के जरिए पार्टी नेतृत्व को दबाव में लाने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि उनकी वापसी सम्मानजनक हो लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ, तो वह पूरे बिहार में उम्मीदवार उतारकर आरजेडी को नुकसान पहुंचा सकते हैं. तेज प्रताप ने पहले भी ‘लालू-राबड़ी मोर्चा’ जैसे संगठन बनाए हैं, और अब ‘टीम तेज प्रताप’ के बैनर तले सक्रिय हैं.
क्या तेज प्रताप बनेंगे बड़ा संकट?
बिहार की सियासत में तेज प्रताप यादव का यह कदम आरजेडी के लिए एक बड़ा संकट बन सकता है. लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव के लिए यह पारिवारिक और राजनीतिक चुनौती दोनों है. जैसे-जैसे 2025 का विधानसभा चुनाव नजदीक आएगा, तेज प्रताप की रणनीति और आरजेडी का डैमेज कंट्रोल तय करेगा कि बिहार की सियासत में लालू की विरासत का अगला अध्याय क्या होगा.

बिहार में यादव वोट बैंक
बिहार में 14 परसेंट के करीब यादव वोट बैंक है. ऐसे तो लालू प्रसाद यादव इस वोट बैंक पर अकेले राज करते हैं और अब तेजस्वी को वोट बैंक का लाभ मिल रहा है. हालांकि तेज प्रताप यादव के भी बड़ी संख्या में समर्थक है. पार्टी में बड़ी संख्या में ऐसे कार्यकर्ता हैं जो तेज प्रताप यादव के उग्र तेवर को पसंद करते हैं जो तेजस्वी यादव और महागठबंधन के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है.
तेज प्रताप का राजनीतिक सफर
तेज प्रताप यादव 2015 में महुआ के विधायक रह चुके हैं. महागठबंधन की सरकार में स्वास्थ्य मंत्री बनाए गए थे. वो 2020 में हसनपुर से चुनाव जीते थे. 2022 में फिर से जब महागठबंधन की सरकार बनी तो पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के मंत्री बनाए गए थे. तेज प्रताप धर्मनिरपेक्ष संघ (डीएसएस ) भी चलाते रहे हैं. उन्होंने एक बार फिर से महुआ से निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान किया है. नई पार्टी बनाने की भी चर्चा हो रही है. विधानसभा चुनाव हलफनामे के मुताबिक तेज प्रताप ने 12वीं तक की पढ़ाई की है.



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