MUZAFFARPUR

एसएसपी बने मसीहा, जलाभिषेक के दौरान डूबते बच्चे को बचाया, लोगों ने कहा -धन्यवाद मुजफ्फरपुर पुलिस

मुजफ्फरपुर : श्रावण मास की पुण्य तिथि पर, जब तीसरी सोमवारी की पावन बेला आई, तो बाबा भोलेनाथ के चरणों में आस्था की ऐसी गंगा उमड़ी कि गरीबनाथ मंदिर से लेकर शहर की गलियों तक हर हर महादेव का जयघोष गूंज उठा।इसी अद्भुत धार्मिक समागम के बीच, एक दृश्य ऐसा भी घटित हुआ जो दिलों को छू गया।

भीड़ में एक पिता अपने मासूम बच्चे के साथ असहाय सा खड़ा था…  आस्था की बाढ़ में मानो वह अपने बच्चे को खो बैठता। तभी मुजफ्फरपुर के वरीय पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार की दृष्टि उस व्याकुल पिता पर पड़ी। मानवता से ओतप्रोत, उन्होंने बिना देर किए अपने अंगरक्षक की सहायता से बच्चे को गोद में उठा लिया, और भीड़ से सुरक्षित बाहर निकाल लाए। कुछ ही क्षणों में, उस पिता ने जब अपने बच्चे को पुलिस अधीक्षक के करुणामय हाथों से पाया, तो उसकी आंखें आंसुओं से भीग गईं। उपस्थित भक्तों ने ताली बजाकर कहा — “शुक्रिया मुजफ्फरपुर पुलिस, आपने बाबा की तरह रक्षा की।”

यह कोई साधारण दिन नहीं था । यह श्रद्धा, सबूरी और सेवा का उत्सव था, जिसमें मुजफ्फरपुर ने एक बार फिर दिखा दिया कि आस्था के सागर में इंसानियत की नाव कभी डूबती नहीं। करीब डेढ़ लाख श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक कर बाबा को अर्पण किया गंगाजल, और चार लाख भक्तों की आहट से मंदिर परिसर भक्ति से थरथरा उठा। दो किलोमीटर लंबी लाइनें किसी तपस्या से कम नहीं थीं।

रात 12 बजे से ही जलाभिषेक का सिलसिला प्रारंभ हो चुका था। हर कोई अपने दुख, पीड़ा, मन्नतें और प्रेम का अर्घ्य लेकर बाबा के द्वार पर आया था। गरीबनाथ मंदिर, जिसे उत्तर बिहार का बाबा धाम कहा जाता है, आज केवल भक्ति का केंद्र नहीं था, बल्कि करुणा और कर्तव्य का मंदिर बन गया। शहर में आरडीएस कॉलेज टेंट सिटी से लेकर धर्मशालाओं और CCTV निगरानी तक, हर स्तर पर व्यवस्था और सेवा भाव झलक रहा था।

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