नालंदा : बिहार के नालंदा में एक ही परिवार के 5 लोगों ने जहरीला पदार्थ खा लिया. मामला पावापुरी थाना क्षेत्र स्थित पावा गांव का है. इस घटना में चार लोगों की मौत हो गई, जबकि एक की हालत नाजुक बनी हुई है. सभी को गंभीर स्थिति में विम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

नालंदा एक ही परिवार के 4 लोगों की मौत
पीड़ित परिवार शेखपुरा जिले के पूरनकामा गांव का है. मृतकों की पहचान 16 वर्षीय दीपा कुमारी, 14 वर्षीय अरिका कुमारी, 38 वर्षीय सोनी कुमारी और 15 वर्षीय शिवम कुमार के रूप में हुई है. परिवार के अन्य सदस्य में 40 वर्षीय धर्मेंद्र कुमार शामिल हैं.

परिवार पर 5 लाख का कर्ज, परेशान था परिवार
बताया जा रहा है कि यह परिवार बीते छह महीने से पावापुरी जल मंदिर के सामने एक किराए के मकान में रह रहा था. धर्मेंद्र कुमार ने यहां कपड़े की दुकान खोली थी, लेकिन लगातार घाटा और करीब 5 लाख रुपये के कर्ज के चलते परिवार मानसिक तनाव में था.

घटना के बाद प्रशासन सतर्क
घटना की जानकारी मिलते ही राजगीर डीएसपी सुनील कुमार, इंस्पेक्टर मनीष भारद्वाज और पावापुरी ओपी प्रभारी मौके पर पहुंचे और जांच शुरू कर दी. धर्मेंद्र कुमार का छोटा बेटा सुरक्षित है, क्योंकि उसने जहरीला पदार्थ नहीं खाया था. वह पुलिस की निगरानी में है.

डॉक्टरों ने दी जानकारी
पावापुरी अस्पताल के डॉक्टर दिव्यांश के अनुसार- ”पांचों मरीजों को जहरीला पदार्थ खाने की स्थिति में यहां लाया गया था. जिसमें चार लोगों की मौत हो चुकी है. अन्य एक की हालत गंभीर है और बेहतर इलाज की कोशिश की जा रही है.”

गांव में पसरा मातम
घटना की सूचना मिलते ही पूरे गांव में हड़कंप मच गया. आस-पास के लोग परिवार को बचाने के लिए तत्काल उन्हें पावापुरी विम्स अस्पताल लेकर पहुंचे. डॉक्टरों ने प्राथमिक जांच के बाद सभी की हालत नाजुक बताई थी. घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन मुस्तैद है. वहीं गांव में मातमी सन्नाटा पसरा है.

बेटे से की जा रही पूछताछ
फिलहाल मामले की जांच की जा रही है. पुलिस छोटे बेटे से भी पूछताछ कर रही है जो इस दर्दनाक घटना में जीवित बच गया है. अधिकारियों का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है ताकि सच्चाई सामने लाई जा सके.

क्या कहती है पुलिस
पूरी घटना के संबंध में राजगीर डीएसपी सुनील कुमार ने बताया कि पीड़ित धर्मेंद्र कुमार पावापुरी में कई सालों से किराए के मकान में रहकर कपड़े का दुकान चला परिवार चला रहे थे. परिवार पर पांच लाख का कर्ज था. कर्ज के कारण उन्हें परेशान किया जा रहा था. शायद इसी कारण परिवार के लोगों ने गलत कदम उठाया है.



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